Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 49 to 51(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 49 से 51 शिवके विवाहका उपसंहार, उनके द्वारा दक्षिणा-वितरण, वर-वधूका कोहबर और वासभवनमें जाना, वहाँ स्त्रियोंका उनसे लोकाचारका पालन कराना, रतिकी प्रार्थनासे शिवद्वारा कामको जीवनदान एवं वर-प्रदान, वर-वधूका एक-दूसरेको मिष्टान्न भोजन कराना और शिवका जनवासेमें लौटना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 49 to 51(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 49 से 51 शिवके विवाहका उपसंहार, उनके द्वारा दक्षिणा-वितरण, वर-वधूका कोहबर और वासभवनमें जाना, वहाँ स्त्रियोंका उनसे लोकाचारका पालन कराना, रतिकी प्रार्थनासे शिवद्वारा कामको जीवनदान एवं वर-प्रदान, वर-वधूका एक-दूसरेको मिष्टान्न भोजन कराना और शिवका जनवासेमें लौटना) … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 48(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 48 शिव-पार्वतीके विवाहका आरम्भ, हिमालयके द्वारा शिवके गोत्रके विषयमें प्रश्न होनेपर नारदजीके द्वारा उत्तर, हिमालयका कन्यादान करके शिवको दहेज देना तथा शिवाका अभिषेक)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 48(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 48 शिव-पार्वतीके विवाहका आरम्भ, हिमालयके द्वारा शिवके गोत्रके विषयमें प्रश्न होनेपर नारदजीके द्वारा उत्तर, हिमालयका कन्यादान करके शिवको दहेज देना तथा शिवाका अभिषेक) (अध्याय 48 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! इसी समय वहाँ गर्गाचार्यसे प्रेरित हो मेनासहित हिमवान्ने … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 47(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 47 वरपक्षके आभूषणोंसे विभूषित शिवाकी नीराजना, कन्यादानके समय वरके साथ सब देवताओंका हिमाचलके घरके आँगनमें विराजना तथा वर-वधूके द्वारा एक-दूसरेका पूजन)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 47(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 47 वरपक्षके आभूषणोंसे विभूषित शिवाकी नीराजना, कन्यादानके समय वरके साथ सब देवताओंका हिमाचलके घरके आँगनमें विराजना तथा वर-वधूके द्वारा एक-दूसरेका पूजन) (अध्याय 47) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! तदनन्तर साथ वेदमन्त्रोंद्वारा दुर्गा और शिवका उपस्नान गिरिश्रेष्ठ हिमवान्‌ने प्रसन्नता और … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 46(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 46 मेनाद्वारा द्वारपर भगवान् शिवका परिछन, उनके रूपको देखकर संतोषका अनुभव, अन्यान्य युवतियोंद्वारा वरकी प्रशंसा, पार्वतीका अम्बिका- पूजनके लिये बाहर निकलना तथा देवताओं और भगवान् शिवका उनके सुन्दर रूपको देखकर प्रसन्न होना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 46(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 46 मेनाद्वारा द्वारपर भगवान् शिवका परिछन, उनके रूपको देखकर संतोषका अनुभव, अन्यान्य युवतियोंद्वारा वरकी प्रशंसा, पार्वतीका अम्बिका- पूजनके लिये बाहर निकलना तथा देवताओं और भगवान् शिवका उनके सुन्दर रूपको देखकर प्रसन्न होना) (अध्याय 46 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं- … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 45(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 45 भगवान् शिवका अपने परम सुन्दर दिव्य रूपको प्रकट करना, मेनाकी प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियोंका शिवके रूपका दर्शन करके जन्म और जीवनको सफल मानना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 45(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 45 भगवान् शिवका अपने परम सुन्दर दिव्य रूपको प्रकट करना, मेनाकी प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियोंका शिवके रूपका दर्शन करके जन्म और जीवनको सफल मानना) (अध्याय 45) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! इसी समय भगवान् विष्णुसे प्रेरित हो … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 44(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 44 मेनाका विलाप, शिवके साथ कन्याका विवाह न करनेका हठ, देवताओं तथा श्रीविष्णुका उन्हें समझाना तथा उनका सुन्दर रूप धारण करनेपर ही शिवको कन्या देनेका विचार प्रकट करना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 44(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 44 मेनाका विलाप, शिवके साथ कन्याका विवाह न करनेका हठ, देवताओं तथा श्रीविष्णुका उन्हें समझाना तथा उनका सुन्दर रूप धारण करनेपर ही शिवको कन्या देनेका विचार प्रकट करना) (अध्याय 44 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! जब हिमाचलप्रिया सती … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 41 to 43(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 41 से 43 हिमवान्द्वारा शिवकी बारातकी अगवानी तथा सबका अभिनन्दन एवं वन्दन, मेनाका नारदजीको बुलाकर उनसे बारातियोंका परिचय पाना तथा शिव और उनके गणोंको देखकर भयसे मूच्छित होना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 41 to 43(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 41 से 43 हिमवान्द्वारा शिवकी बारातकी अगवानी तथा सबका अभिनन्दन एवं वन्दन, मेनाका नारदजीको बुलाकर उनसे बारातियोंका परिचय पाना तथा शिव और उनके गणोंको देखकर भयसे मूच्छित होना) (अध्याय 41 से 43) :-ब्रह्माजी कहते हैं-तदनन्तर भगवान् … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 40 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 40 भगवान् शिवका बारात लेकर हिमालयपुरीकी ओर प्रस्थान)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 40 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 40 भगवान् शिवका बारात लेकर हिमालयपुरीकी ओर प्रस्थान) (अध्याय 40) :-ब्रह्माजी कहते हैं- मुने ! तदनन्तर भगवान् शम्भुने नन्दी आदि सब गणोंको अपने साथ हिमाचलपुरीको चलनेकी प्रसन्नतापूर्वक आज्ञा देते हुए कहा – ‘तुमलोग थोड़े-से गणोंको यहाँ रखकर … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 39 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 39 भगवान् शिवका नारदजीके द्वारा सब देवताओंको निमन्त्रण दिलाना, सबका आगमन तथा शिवका मंगलाचार एवं ग्रहपूजन आदि करके कैलाससे बाहर निकलना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 39 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 39 भगवान् शिवका नारदजीके द्वारा सब देवताओंको निमन्त्रण दिलाना, सबका आगमन तथा शिवका मंगलाचार एवं ग्रहपूजन आदि करके कैलाससे बाहर निकलना) (अध्याय 39) :-नारदजी बोले-विष्णुशिष्य महाप्राज्ञ तात विधातः ! आपको नमस्कार है। कृपानिधे ! आपके मुँहसे यह … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 37 or 38 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 37 और 38 हिमवान्‌का भगवान् शिवके पास लग्नपत्रिका भेजना, विवाहके लिये आवश्यक सामान जुटाना, मंगलाचारका आरम्भ करना, उनका निमन्त्रण पाकर पर्वतों और नदियोंका दिव्यरूपमें आना, पुरीकी सजावट तथा विश्वकर्माद्वारा दिव्यमण्डप एवं देवताओंके निवासके लिये दिव्यलोकोंका निर्माण करवाना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 37 or 38 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 37 और 38 हिमवान्‌का भगवान् शिवके पास लग्नपत्रिका भेजना, विवाहके लिये आवश्यक सामान जुटाना, मंगलाचारका आरम्भ करना, उनका निमन्त्रण पाकर पर्वतों और नदियोंका दिव्यरूपमें आना, पुरीकी सजावट तथा विश्वकर्माद्वारा दिव्यमण्डप एवं देवताओंके निवासके लिये दिव्यलोकोंका … Read more

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