Shiv puran rudra samhita yudh khand chapter 2 to 5 (शिव पुराण रुद्रसंहिता युद्ध  खंड अध्याय 2 से 5 तारकपुत्रोंके प्रभावसे संतप्त हुए देवोंकी ब्रह्माके पास करुण पुकार, ब्रह्माका उन्हें शिवके पास भेजना, शिवकी आज्ञासे देवोंका विष्णुकी शरणमें जाना और विष्णुका उन दैत्योंको मोहित करके उन्हें आचारभ्रष्ट करना)

(रुद्रसंहिता, पंचम (युद्ध) खण्ड) Shiv puran rudra samhita yudh khand chapter 2 to 5 (शिव पुराण रुद्रसंहिता युद्ध  खंड अध्याय 2 से 5 तारकपुत्रोंके प्रभावसे संतप्त हुए देवोंकी ब्रह्माके पास करुण पुकार, ब्रह्माका उन्हें शिवके पास भेजना, शिवकी आज्ञासे देवोंका विष्णुकी शरणमें जाना और विष्णुका उन दैत्योंको मोहित करके उन्हें आचारभ्रष्ट करना) (अध्याय 1 से … Read more

Shiv puran rudra samhita yudh khand chapter 1 (शिव पुराण रुद्रसंहिता युद्ध खंड अध्याय 1 तारकपुत्र तारकाक्ष, विद्युन्माली और कमलाक्षकी तपस्या, ब्रह्माद्वारा उन्हें वर-प्रदान, मयद्वारा उनके लिये तीन पुरोंका निर्माण और उनकी सजावट-शोभाका वर्णन)

(रुद्रसंहिता, पंचम (युद्ध) खण्ड) Shiv puran rudra samhita yudh khand chapter 1 (शिव पुराण रुद्रसंहिता युद्ध खंड अध्याय 1 तारकपुत्र तारकाक्ष, विद्युन्माली और कमलाक्षकी तपस्या, ब्रह्माद्वारा उन्हें वर-प्रदान, मयद्वारा उनके लिये तीन पुरोंका निर्माण और उनकी सजावट-शोभाका वर्णन) (अध्याय 1) :-नारदजीने कहा-पिताजी ! जो गणेश और स्वामिकार्तिककी उत्तम कथाओंसे ओतप्रोत तथा आनन्द प्रदान करनेवाला है, … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 20 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 20 स्वामिकार्तिक और गणेशकी बाल-लीला, दोनोंका परस्पर विवाहके विषयमें विवाद, शिवजीद्वारा पृथ्वी-परिक्रमाका आदेश, कार्तिकेयका प्रस्थान, गणेशका माता-पिताकी परिक्रमा करके उनसे पृथ्वी-परिक्रमा स्वीकृत कराना, विश्वरूपकी सिद्धि और बुद्धि नामक दोनों कन्याओंके साथ गणेशका विवाह और उनसे क्षेम तथा लाभ नामक दो पुत्रोंकी उत्पत्ति, कुमारका पृथ्वी-परिक्रमा करके लौटना और क्षुब्ध होकर क्रौंचपर्वतपर चला जाना, कुमारखण्डके श्रवणकी महिमा)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 20 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 20 स्वामिकार्तिक और गणेशकी बाल-लीला, दोनोंका परस्पर विवाहके विषयमें विवाद, शिवजीद्वारा पृथ्वी-परिक्रमाका आदेश, कार्तिकेयका प्रस्थान, गणेशका माता-पिताकी परिक्रमा करके उनसे पृथ्वी-परिक्रमा स्वीकृत कराना, विश्वरूपकी सिद्धि और बुद्धि नामक दोनों कन्याओंके साथ गणेशका विवाह और उनसे क्षेम तथा … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 19 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 19 पार्वतीद्वारा गणेशजीको वरदान, देवोंद्वारा उन्हें अग्रपूज्य माना जाना, शिवजीद्वारा गणेशको सर्वाध्यक्ष पद प्रदान और गणेशचतुर्थीव्रतका वर्णन, तत्पश्चात् सभी देवताओंका उनकी स्तुति करके हर्षपूर्वक अपने-अपने स्थानको लौट जाना)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 19 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 19 पार्वतीद्वारा गणेशजीको वरदान, देवोंद्वारा उन्हें अग्रपूज्य माना जाना, शिवजीद्वारा गणेशको सर्वाध्यक्ष पद प्रदान और गणेशचतुर्थीव्रतका वर्णन, तत्पश्चात् सभी देवताओंका उनकी स्तुति करके हर्षपूर्वक अपने-अपने स्थानको लौट जाना) (अध्याय 19) :-ब्रह्माजी कहते हैं-मुने ! जब विकृत स्वरूपवाले … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 13 to 18 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 13 से 18 शिवाका अपनी मैलसे गणेशको उत्पन्न करके द्वारपाल-पदपर नियुक्त करना, गणेशद्वारा शिवजीके रोके जानेपर उनका शिवगणोंके साथ भयंकर संग्राम, शिवजीद्वारा गणेशका शिरश्छेदन, कुपित हुई शिवाका शक्तियोंको उत्पन्न करना और उनके द्वारा प्रलय मचाया जाना, देवताओं और ऋषियोंका स्तवनद्वारा पार्वतीको प्रसन्न करना, उनके द्वारा पुत्रको जिलाये जानेकी बात कही जानेपर शिवजीके आज्ञानुसार हाथीका सिर लाया जाना और उसे गणेशके धड़से जोड़कर उन्हें जीवित करना)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 13 to 18 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 13 से 18 शिवाका अपनी मैलसे गणेशको उत्पन्न करके द्वारपाल-पदपर नियुक्त करना, गणेशद्वारा शिवजीके रोके जानेपर उनका शिवगणोंके साथ भयंकर संग्राम, शिवजीद्वारा गणेशका शिरश्छेदन, कुपित हुई शिवाका शक्तियोंको उत्पन्न करना और उनके द्वारा प्रलय मचाया … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 9 to 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 9 से 12 ब्रह्माजीकी आज्ञासे कुमारका युद्धके लिये जाना, तारकके साथ उनका भीषण संग्राम और उनके द्वारा तारकका वध, तत्पश्चात् देवोंद्वारा कुमारका अभिनन्दन और स्तवन, कुमारका उन्हें वरदान देकर कैलासपर जा शिव-पार्वतीके पास निवास करना)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 9 to 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 9 से 12 ब्रह्माजीकी आज्ञासे कुमारका युद्धके लिये जाना, तारकके साथ उनका भीषण संग्राम और उनके द्वारा तारकका वध, तत्पश्चात् देवोंद्वारा कुमारका अभिनन्दन और स्तवन, कुमारका उन्हें वरदान देकर कैलासपर जा शिव-पार्वतीके पास निवास करना) … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 55(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 55 शिव-पार्वती तथा उनकी बारातकी विदाई, भगवान् शिवका समस्त देवताओंको विदा करके कैलासपर रहना और पार्वतीखण्डके श्रवणकी महिमा)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 55(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 55 शिव-पार्वती तथा उनकी बारातकी विदाई, भगवान् शिवका समस्त देवताओंको विदा करके कैलासपर रहना और पार्वतीखण्डके श्रवणकी महिमा) (अध्याय 55) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! ब्राह्मणीने देवी पार्वतीको पतिव्रत-धर्मकी शिक्षा देनेके पश्चात् मेनाको बुलाकर कहा – ‘महारानीजी ! अब … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 54(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 54 मेनाकी इच्छाके अनुसार एक ब्राह्मण-पत्नीका पार्वतीको पतिव्रतधर्मका उपदेश देना)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 54(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 54 मेनाकी इच्छाके अनुसार एक ब्राह्मण-पत्नीका पार्वतीको पतिव्रतधर्मका उपदेश देना) (अध्याय 54 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं- नारद ! तदनन्तर सप्तर्षियोंने हिमालयसे कहा- ‘गिरिराज ! अब आप अपनी पुत्री पार्वतीदेवीकी यात्राका उचित प्रबन्ध करें।’ मुनीश्वर ! यह सुनकर पार्वतीके … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 53(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 53 चतुर्थीकर्म, बारातका कई दिनोंतक ठहरना, सप्तर्षियोंके समझानेसे हिमालयका बारातको विदा करनेके लिये राजी होना, मेनाका शिवको अपनी कन्या सौंपना तथा बारातका पुरीके बाहर जाकर ठहरना)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 53(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 53 चतुर्थीकर्म, बारातका कई दिनोंतक ठहरना, सप्तर्षियोंके समझानेसे हिमालयका बारातको विदा करनेके लिये राजी होना, मेनाका शिवको अपनी कन्या सौंपना तथा बारातका पुरीके बाहर जाकर ठहरना) (अध्याय 53) :-ब्रह्माजी कहते हैं- तदनन्तर विष्णु आदि देवता तथा ऋषि कैलास … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 52(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 52 रातको परम सुन्दर सजे हुए वासगृहमें शयन करके प्रातःकाल भगवान् शिवका जनवासेमें आगमन)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 52(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 52 रातको परम सुन्दर सजे हुए वासगृहमें शयन करके प्रातःकाल भगवान् शिवका जनवासेमें आगमन) (अध्याय 52) :-ब्रह्माजी कहते हैं-तात ! तदनन्तर भाग्यवानोंमें श्रेष्ठ और चतुर गिरिराज हिमवान्ने बारातियोंको भोजन करानेके लिये अपने आँगनको सुन्दर ढंगसे सजाया तथा अपने … Read more

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