Shiv puran kotirudra samhita chapter 2 to 4 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 2 काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 2 to 4 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 2 से 4 काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा)  :-सूतजी कहते हैं-मुनीश्वरो ! गंगाजीके तटपर मुक्तिदायिनी काशीपुरी सुप्रसिद्ध है। वह भगवान् शिवकी निवासस्थली मानी गयी है। उसे शिवलिंगमयी ही समझना … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 1 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 1 द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 1 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 1 द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा)   “यो धत्ते निजमाययैव भुवनाकारं विकारोज्झितो यस्याहुः करुणाकटाक्षविभवौ स्वर्गापवर्गाभिधौ । प्रत्यग्बोधसुखाद्वयं हृदि सदा पश्यन्ति यं योगिन- स्तस्मै शैलसुताञ्चितार्द्धवपुषे शश्वन्नमस्तेजसे ॥ १ ॥” “जो निर्विकार होते हुए भी अपनी मायासे ही विराट् विश्वका आकार … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 42 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 42 शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन)

शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 42 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 42 शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन)   :-नन्दीश्वरजी कहते हैं-मुने ! अब तुम सर्वव्यापी भगवान् शंकरके बारह अन्य ज्योतिर्लिंगस्वरूपी अवतारोंका वर्णन श्रवण करो, जो अनेक प्रकारके मंगल करनेवाले हैं। (उनके नाम ये हैं-) सौराष्ट्रमें सोमनाथ, श्रीशैलपर मल्लिकार्जुन, उज्जयिनीमें महाकाल, ओंकारमें अमरेश्वर, हिमालयपर केदार, डाकिनीमें … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 40 or 41 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 40 और 41 अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 40 or 41 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 40 और 41 अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना) :-नन्दीश्वरजी कहते हैं- महाज्ञानी सनत्कुमारजी ! अब परमात्मा शिवकी उस … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 39 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 39 किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 39 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 39 किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध) :-नन्दीश्वरजी कहते हैं-मुने ! तदनन्तर अर्जुन व्यासजीके उपदेशानुसार विधिपूर्वक स्नान तथा न्यास आदि करके परम भक्तिके साथ शिवजीका ध्यान करने … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 32 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 32 शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 32 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 32 शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति) :-नन्दीश्वर कहते हैं- सनत्कुमारजी ! अब मैं परमात्मा शिवके सुरेश्वरावतारका वर्णन करूँगा, जिन्होंने धौम्यके बड़े भाई उपमन्युका हितसाधन किया था। उपमन्यु व्याघ्घ्रपाद मुनिके पुत्र थे। उन्होंने पूर्वजन्ममें ही सिद्धि प्राप्त कर ली थी … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 31 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 31 भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 31 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 31 भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा) :-नन्दीश्वर कहते हैं-मुनिश्रेष्ठ ! अब तुम भगवान् शम्भुके नारी-संदेहभंजक भिक्षु- अवतारका वर्णन सुनो, जिसे उन्होंने अपने भक्तपर दया करके ग्रहण किया था। विदर्भ देशमें सत्यरथ नामसे प्रसिद्ध एक राजा थे, जो धर्ममें तत्पर, सत्यशील और … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 30 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 30 भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 30 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 30 भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन) :-नन्दीश्वर कहते हैं-सनत्कुमार ! अब तुम परमेश्वर शिवके अवधूतेश्वर नामक अवतारका वर्णन सुनो, जिसने इन्द्रके घमंडको चूर-चूर कर दिया था। पहलेकी बात है, इन्द्र सम्पूर्ण देवताओं तथा बृहस्पतिजीको साथ लेकर भगवान् शिवका दर्शन करनेके लिये … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 29 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 29 भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 29 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 29 भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा) :-नन्दीश्वर कहते हैं- सनत्कुमारजी ! भगवान् शम्भुके एक उत्तम अवतारका नाम कृष्णदर्शन है, जिसने राजा नभगको ज्ञान प्रदान किया था। उसका वर्णन करता हूँ, सुनो। श्राद्धदेव नामक मनुके जो इक्ष्वाकु आदि पुत्र थे, उनमें नवमका नाम नभग … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 28  शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 28 भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 28  (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 28 भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार) :-नन्दीश्वर कहते हैं- मुने ! अब मैं परमात्मा शिवके यतिनाथ नामक अवतारका वर्णन करता हूँ। मुनीश्वर ! अर्बुदाचल नामक पर्वतके समीप एक भील रहता था, जिसका नाम था आहुक। उसकी पत्नीको लोग आहुका कहते थे। वह … Read more

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