Shiv puran kotirudra samhita chapter 26 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 26 पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना,)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 26 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 26 पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना,) :-देवताओंका वहाँ बृहस्पतिके सिंहराशिपर आनेपर गंगाजीके विशेष माहात्म्यको स्वीकार करना, गंगाका गौतमी (या गोदावरी) नामसे और शिवका त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके नामसे विख्यात होना तथा इन दोनोंकी … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 24 to 25 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 24 और 25 त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय,)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 24 or 25 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 24 और 25 त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय,) :-सूतजी कहते हैं-मुनिवरो ! सुनो, मैंने सद्गुरु … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 23 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 23 वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 23 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 23 वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य) :-सूतजी कहते हैं-मुनीश्वरो ! मैं संक्षेपसे ही वाराणसी तथा विश्वेश्वरके परम सुन्दर माहात्म्यका वर्णन करता हूँ, सुनो। एक समयकी बात है कि पार्वतीदेवीने लोक- हितकी कामनासे बड़ी प्रसन्नताके साथ भगवान् शिवसे अविमुक्त क्षेत्र और अविमुक्त लिंगका माहात्म्य पूछा। तब … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 22 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 22 विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 22 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 22 विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन) :-सूतजी कहते हैं-मुनिवरो ! अब मैं काशीके विश्वेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका माहात्म्य बताऊँगा, जो महापातकोंका भी नाश करनेवाला है। तुमलोग सुनो, इस भूतलपर जो कोई भी वस्तु दृष्टिगोचर होती है, वह सच्चिदानन्दस्वरूप, निर्विकार एवं सनातन … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 19 to 21 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 19 से 21 केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 19 to 21 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 19 से 21 केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन) :-सूतजी कहते हैं-ब्राह्मणो ! भगवान् विष्णुके जो नर-नारायण नामक दो अवतार हैं और भारतवर्षके बदरिकाश्रमतीर्थमें तपस्या करते हैं, उन दोनोंने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसमें स्थित हो पूजा ग्रहण … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 18 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 18  विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 18 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 18  विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन) ऋषियोंने कहा- महाभाग सूतजी ! आपने अपने भक्तकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक शिवलिंगकी बड़ी अद्भुत कथा सुनायी है। अब कृपा करके चौथे ज्योतिर्लिंगका परिचय दीजिये – ओंकार- तीर्थमें सर्वपातकहारी परमेश्वरका जो ज्योतिर्लिंग है, उसके … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 17 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 17 महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 17 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 17 महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा) :-सूतजी कहते हैं-ब्राह्मणो ! भक्तोंकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक ज्योति- लिंगका माहात्म्य भक्तिभावको बढ़ानेवाला है। उसे आदरपूर्वक सुनो। उज्जयिनीमें चन्द्रसेन नामक एक महान् राजा थे, जो सम्पूर्ण शास्त्रोंके तत्त्वज्ञ, शिवभक्त और जितेन्द्रिय थे। … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 15 or 16 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 15 से 16 मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 15 or 16 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 15 और 16 मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा) :-सूतजी कहते हैं-महर्षियो ! अब मैं मल्लिकार्जुनके प्रादुर्भावका प्रसंग सुनाता हूँ, जिसे सुनकर बुद्धिमान् पुरुष सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। जब महाबली तारकशत्रु शिवापुत्र कुमार कार्तिकेय सारी पृथ्वीकी … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 8 to 14 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 8 से 14 प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 8 to 14 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 8 से 14 प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा) :-तदनन्तर कपिला नगरीके कालेश्वर, रामेश्वर आदिकी महिमा बताते हुए सूतजीने समुद्रके तटपर स्थित गोकर्णक्षेत्रके शिवलिंगोंकी महिमाका वर्णन किया। फिर महाबल नामक शिवलिंगका अद्भुत माहात्म्य सुनाकर अन्य बहुत-से शिवलिंगोंकी विचित्र माहात्म्य-कथाका वर्णन … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 5 to 7 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 5 से 7 ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें ‘नन्दिकेश’ नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 5 to 7 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 5 से 7 ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें ‘नन्दिकेश’ नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना) :-तदनन्तर श्रीसूतजीने जब बहुत-से शिवलिंगोंके कथाप्रसंग सुना दिये, तब ऋषियोंने पूछा- ‘महामते सूतजी ! वैशाख … Read more

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