Shiv puran uma samhita chapter 46 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 46 सम्पूर्ण देवताओंके तेजसे देवीका महालक्ष्मीरूपमें अवतार और उनके द्वारा महिषासुरका वध)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 46 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 46 सम्पूर्ण देवताओंके तेजसे देवीका महालक्ष्मीरूपमें अवतार और उनके द्वारा महिषासुरका वध)   :-ऋषि कहते हैं-राजन् ! रम्भ नामसे प्रसिद्ध एक असुर था, जो दैत्यवंशका शिरोमणि माना जाता था। उससे महा- तेजस्वी महिष नामक दानवका जन्म हुआ था। दानवराज महिष समस्त देवताओंको युद्धमें … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 28 to 45 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 28 से 45 भगवती उमाके कालिका-अवतारकी कथा – समाधि और सुरथके समक्ष मेधाका देवीकी कृपासे मधुकैटभके वधका प्रसंग सुनाना)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 28 to 45 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 28 से 45 भगवती उमाके कालिका-अवतारकी कथा – समाधि और सुरथके समक्ष मेधाका देवीकी कृपासे मधुकैटभके वधका प्रसंग सुनाना) :-इसके अनन्तर छाया पुरुष, सर्ग, कश्यपवंश, मन्वन्तर, मनुवंश, सत्यव्रतादि- वंश, पितृकल्प तथा व्यासोत्पत्ति आदिका वर्णन सुननेके पश्चात् मुनियोंने सूतजीसे कहा-ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ सूतजी … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 27 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 27 काल या मृत्युको जीतकर अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ – प्राणायाम, भ्रूमध्यमें अग्निका ध्यान, मुखसे वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वाद्वारा गलेकी घाँटीका स्पर्श)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 27 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 27 काल या मृत्युको जीतकर अमरत्व प्राप्त करनेकी चार यौगिक साधनाएँ – प्राणायाम, भ्रूमध्यमें अग्निका ध्यान, मुखसे वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वाद्वारा गलेकी घाँटीका स्पर्श) :-पार्वती बोलीं- प्रभो ! यदि आप प्रसन्न हैं तो योगी योगाकाशजनित वायुपदको जिस प्रकार प्राप्त होता है, वह … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 26 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 26 कालको जीतनेका उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकारके अनुसंधान और उससे प्राप्त होनेवाली सिद्धियोंका वर्णन)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 26 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 26 कालको जीतनेका उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकारके अनुसंधान और उससे प्राप्त होनेवाली सिद्धियोंका वर्णन) :’देवी पार्वतीने कहा- प्रभो! कालसे आकाशका भी नाश होता है। वह भयंकर काल बड़ा विकराल है। वह स्वर्गका भी एकमात्र स्वामी है। आपने उसे दग्ध कर दिया था, … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 17 to 25 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 17 से 25 मृत्युकाल निकट आनेके कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 17 to 25 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 17 से 25 मृत्युकाल निकट आनेके कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन) :-इसके पश्चात् द्वीपों, लोकों और मनुओंका परिचय देकर संग्रामके फल, शरीर एवं स्त्री- स्वभाव आदिका वर्णन किया गया। तदनन्तर कालके विषयमें व्यासजीके पूछनेपर सनत्कुमारजीने कहा-मुनिश्रेष्ठ ! पूर्वकालमें पार्वतीजीने नाना प्रकारकी … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 13 to 16 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 13 से 16 वेद और पुराणोंके स्वाध्याय तथा विविध प्रकारके दानकी महिमा, नरकोंका वर्णन तथा उनमें गिरानेवाले पापोंका दिग्दर्शन, पापोंके लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञानके महत्त्वका प्रतिपादन)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 13 to 16 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 13 से 16 वेद और पुराणोंके स्वाध्याय तथा विविध प्रकारके दानकी महिमा, नरकोंका वर्णन तथा उनमें गिरानेवाले पापोंका दिग्दर्शन, पापोंके लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञानके महत्त्वका प्रतिपादन) :-सनत्कुमारजी कहते हैं-मुने ! जो वनमें जंगली फल-मूल खाकर तप करता है और … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 12 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 12 जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्यभाषण और तपकी महिमा)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 12 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 12 जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्यभाषण और तपकी महिमा) :-सनत्कुमारजी कहते हैं- व्यासजी ! जलदान सबसे श्रेष्ठ है। वह सब दानोंमें सदा उत्तम है; क्योंकि जल सभी जीवसमुदायको तृप्त करनेवाला जीवन कहा गया है। इसलिये बड़े स्नेहके साथ अनिवार्यरूपसे प्रपादान (पौंसला चलाकर दूसरोंको पानी … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 11 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 11 यमलोकके मार्गमें सुविधा प्रदान करनेवाले विविध दानोंका वर्णन)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 11 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 11 यमलोकके मार्गमें सुविधा प्रदान करनेवाले विविध दानोंका वर्णन) :-व्यासजी बोले-प्रभो ! पापी मनुष्य बड़े दुःखसे यमलोकके मार्गमें जाते हैं। अब आप मुझे उन धर्मोंका परिचय दीजिये, जिनसे जीव सुखपूर्वक यममार्गपर यात्रा करते हैं। सनत्कुमारजीने कहा- मुने ! अपना किया हुआ शुभाशुभ कर्म … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 9 or 10 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 9 और 10 विभिन्न पापोंके कारण मिलनेवाली नरकयातनाका वर्णन तथा कुक्कुरबलि, काकबलि एवं देवता आदिके लिये दी हुई बलिकी आवश्यकता एवं महत्ताका प्रतिपादन)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 9 or 10 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 9 और 10 विभिन्न पापोंके कारण मिलनेवाली नरकयातनाका वर्णन तथा कुक्कुरबलि, काकबलि एवं देवता आदिके लिये दी हुई बलिकी आवश्यकता एवं महत्ताका प्रतिपादन) :-सनत्कुमारजी कहते हैं- व्यासजी ! इन सब भयानक पीड़ादायक नरकोंमें पापी जीवोंको अत्यन्त भीषण नरकयातना भोगनी पड़ती है। … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 8 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 8 नरकोंकी अट्ठाईस कोटियों तथा प्रत्येकके पाँच-पाँच नायकके क्रमसे एक सौ चालीस रौरवादि नरकोंकी नामावली)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 8 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 8 नरकोंकी अट्ठाईस कोटियों तथा प्रत्येकके पाँच-पाँच नायकके क्रमसे एक सौ चालीस रौरवादि नरकोंकी नामावली) :-सनत्कुमारजी कहते हैं- व्यासजी ! तदनन्तर यमदूत पापियोंको अत्यन्त तपे हुए पत्थरपर बड़े वेगसे दे मारते हैं, मानो वज्रसे बड़े-बड़े वृक्षोंको धराशायी कर दिया गया हो। उस समय … Read more

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