Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 13 or 14 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 13 और 14 भगवान् रुद्रके ब्रह्माजीके मुखसे प्रकट होनेका रहस्य, रुद्रके महामहिम स्वरूपका वर्णन, उनके द्वारा रुद्रगणोंकी सृष्टि तथा ब्रह्माजीके रोकनेसे उनका सृष्टिसे विरत होना)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 13 or 14 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 13 और 14 भगवान् रुद्रके ब्रह्माजीके मुखसे प्रकट होनेका रहस्य, रुद्रके महामहिम स्वरूपका वर्णन, उनके द्वारा रुद्रगणोंकी सृष्टि तथा ब्रह्माजीके रोकनेसे उनका सृष्टिसे विरत होना) :-ऋषि बोले-प्रभो! आपने चतुर्मुख ब्रह्माके मुखसे परमात्मा रुद्रदेवकी सृष्टि बतायी है। इस विषयमें हमको संशय … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 7 to 12 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 7 से 12 ब्रह्माजीकी मूर्च्छा, उनके मुखसे रुद्रदेवका प्राकट्य, सप्राण हुए ब्रह्माजीके द्वारा आठ नामोंसे महेश्वरकी स्तुति तथा रुद्रकी आज्ञासे ब्रह्माद्वारा सृष्टि-रचना)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 7 to 12 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 7 से 12 ब्रह्माजीकी मूर्च्छा, उनके मुखसे रुद्रदेवका प्राकट्य, सप्राण हुए ब्रह्माजीके द्वारा आठ नामोंसे महेश्वरकी स्तुति तथा रुद्रकी आज्ञासे ब्रह्माद्वारा सृष्टि-रचना)   :-तदनन्तर कालमहिमा, प्रलय, ब्रह्माण्डकी स्थिति तथा सर्ग आदिका वर्णन करके वायु देवताने कहा-पहले ब्रह्माजीने पाँच मानसपुत्रोंको उत्पन्न … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 6 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 6 महेश्वरकी महत्ताका प्रतिपादन)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 6 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 6 महेश्वरकी महत्ताका प्रतिपादन) :-वायुदेवता कहते हैं- महर्षियो ! इस विश्वका निर्माण करनेवाला कोई पति है, जो अनन्त रमणीय गुणोंका आश्रय कहा गया है। वही पशुओंको पाशसे मुक्त करनेवाला है। उसके बिना संसारकी सृष्टि कैसे हो सकती है; क्योंकि पशु अज्ञानी और … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 4 or 5 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 4 और 5 नैमिषारग्य में दीर्घसत्र के अन्त में मुनियों के पास वायुदेवता का आगमन, उनका सत्कार तथा ऋषियों के पूछने पर वायु के द्वारा पशु, पाश एवं पशुपति का तात्त्विक विवेचन)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 4 or 5 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 4 और 5 नैमिषारग्य में दीर्घसत्र के अन्त में मुनियों के पास वायुदेवता का आगमन, उनका सत्कार तथा ऋषियों के पूछने पर वायु के द्वारा पशु, पाश एवं पशुपति का तात्त्विक विवेचन) :-सृतजी कहते हैं-मुनीश्वरो! उस समय उत्तम व्रता पालन … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 3(शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 3 ब्रह्माजीके द्वारा परमतत्त्वके रूपमें भगवान् शिवकी ही महत्ताका प्रतिपात्न, उनकी कृपाको ही सब साधनोंका फल बताना तथा उनकी आज्ञासे सब मुनियोंका नैमिषारण्यमें आना)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 3(शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 3 ब्रह्माजीके द्वारा परमतत्त्वके रूपमें भगवान् शिवकी ही महत्ताका प्रतिपात्न, उनकी कृपाको ही सब साधनोंका फल बताना तथा उनकी आज्ञासे सब मुनियोंका नैमिषारण्यमें आना)  -ब्रह्माजी ने कहा-मुनियो ! जिन्हें न पाकर मन सहित वाणी लौट आती है, जिनके आनन्दमय स्वर का अनुभव करनेवाला पुरुष … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 2(शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 2 ऋषियों का ब्रह्माजी के पास जा उनकी स्तुति करके उनसे परम पुरुष के विषय में प्रश्न करना और ब्रह्माजी का आनन्दमग्न हो ‘रुद्र’ कहकर उत्तर देना)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 2(शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 2 ऋषियों का ब्रह्माजी के पास जा उनकी स्तुति करके उनसे परम पुरुष के विषय में प्रश्न करना और ब्रह्माजी का आनन्दमग्न हो ‘रुद्र’ कहकर उत्तर देना) :-सूतजी कहते हैं-महर्षियो ! पहले अनेक कल्पों के बारंबार बीतने पर सुदीर्घकाल के पश्चात् जब यह … Read more

Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 1(वायु संहिता अध्याय 1 प्रयागमें ऋषियोंद्वारा सम्मानित सूतजीके द्वारा कथाका आरम्भ, विद्यास्थानों एवं पुराणोंका परिचय तथा वायुसंहिताका प्रारम्भ)

(वायवीयसंहिता(पूर्वखण्ड)) Shiv puran vayu samhita purvkhand chapter 1(वायु संहिता अध्याय 1 प्रयागमें ऋषियोंद्वारा सम्मानित सूतजीके द्वारा कथाका आरम्भ, विद्यास्थानों एवं पुराणोंका परिचय तथा वायुसंहिताका प्रारम्भ)   व्यास उवाच “नमः शिवाय सोमाय सगणाय ससूनवे। प्रधानपुरुषेशाय सर्गग्वित्यन्तहेतवे ॥ शक्तिरप्रतिमा यस्य हौश्वर्य चापि सर्वगम् । स्वामित्वं च विभुत्वं च स्वभाव सम्प्रचक्षते ॥ तमजं विश्वकर्माणं शाश्वतं शिवमव्ययम् । महादेवं … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 22 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 22 यतिके लिये एकादशाह-कृत्यका वर्णन)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 22 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 22 यतिके लिये एकादशाह-कृत्यका वर्णन)   स्कन्दजी कहते हैं-वामदेव ! यतिका एकादशाह प्राप्त होनेपर जो विधि बतायी गयी है, उसका मैं तुम्हारे स्नेहवश वर्णन करता हूँ। मिट्टीकी वेदी बनाकर उसका सम्मार्जन और उपलेपन करे। तत्पश्चात् पुण्याहवाचनपूर्वक प्रोक्षण करके पश्चिमसे लेकर पूर्वकी ओर पाँच मण्डल … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 20 or 21 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 20 और 21 यतिके अन्त्येष्टिकर्मकी दशाहपर्यन्त विधिका वर्णन)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 20 or 21 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 20 और 21 यतिके अन्त्येष्टिकर्मकी दशाहपर्यन्त विधिका वर्णन) :-वामदेवजी बोले-जो मुक्त यति हैं, उनके शरीरका दाहकर्म नहीं होता। मरनेपर उनके शरीरको गाड़ दिया जाता है, यह मैंने सुना है। मेरे गुरु कार्तिकेय ! आप प्रसन्नतापूर्वक यतियोंके उस अन्त्येष्टिकर्मका मुझसे वर्णन कीजिये; क्योंकि … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 17 to 19 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 17 से 19 महावाक्योंके अर्थपर विचार तथा संन्यासियोंके योगपट्टका प्रकार)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 17 to 19 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 17 से 19 महावाक्योंके अर्थपर विचार तथा संन्यासियोंके योगपट्टका प्रकार)   :-स्कन्दजी कहते हैं-मुने अब महावाक्य प्रस्तुत किये जाते हैं- १-प्रज्ञानं ब्रह्म (ऐतरेय० ३।३ तथा आत्मप्र० १), २-अहं ब्रह्मास्मि (बृहदारण्यक०१।४।१०), ३-तत्त्वमसि (छा० उ० ख० ८ से १६ तक),४-अयमात्मा ब्रह्म (माण्डुक्य० २: बृह० … Read more

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