Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 18 or 19 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 18 और 19 रुद्रकी नेत्राग्निसे कामका भस्म होना, रतिका विलाप, देवताओंकी प्रार्थनासे शिवका कामको द्वापरमें प्रद्युम्नरूपसे नूतन शरीरकी प्राप्तिके लिये वर देना और रतिका शम्बर-नगरमें जाना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 18 or 19 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 18 और 19 रुद्रकी नेत्राग्निसे कामका भस्म होना, रतिका विलाप, देवताओंकी प्रार्थनासे शिवका कामको द्वापरमें प्रद्युम्नरूपसे नूतन शरीरकी प्राप्तिके लिये वर देना और रतिका शम्बर-नगरमें जाना) (अध्याय 18 और 19) ब्रह्माजी कहते हैं-मुने! काम अपने साथी … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 17 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 17 इन्द्रद्वारा कामका स्मरण, उसके साथ उनकी बातचीत तथा उनके कहनेसे कामका शिवको मोहनेके लिये प्रस्थान)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 17 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 17 इन्द्रद्वारा कामका स्मरण, उसके साथ उनकी बातचीत तथा उनके कहनेसे कामका शिवको मोहनेके लिये प्रस्थान) (अध्याय 17 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! देवताओंके चले जानेपर दुरात्मा तारक दैत्यसे पीड़ित हुए इन्द्रने कामदेवका स्मरण किया। कामदेव तत्काल … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 14 to 16 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 14 से 16 तारकासुरके सताये हुए देवताओंका ब्रह्माजीको अपनी कष्टकथा सुनाना, ब्रह्माजीका उन्हें पार्वतीके साथ शिवके विवाहके लिये उद्योग करनेका आदेश देना, ब्रह्माजीके समझानेसे तारकासुरका स्वर्गको छोड़ना और देवताओंका वहाँ रहकर लक्ष्यसिद्धिके लिये यत्नशील होना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 14 to 16 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 14 से 16 तारकासुरके सताये हुए देवताओंका ब्रह्माजीको अपनी कष्टकथा सुनाना, ब्रह्माजीका उन्हें पार्वतीके साथ शिवके विवाहके लिये उद्योग करनेका आदेश देना, ब्रह्माजीके समझानेसे तारकासुरका स्वर्गको छोड़ना और देवताओंका वहाँ रहकर लक्ष्यसिद्धिके लिये यत्नशील होना) … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 13 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 13 पार्वती और शिवका दार्शनिक संवाद, शिवका पार्वतीको अपनी सेवाके लिये आज्ञा देना तथा पार्वतीद्वारा भगवान्‌की प्रतिदिन सेवा)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 13 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 13 पार्वती और शिवका दार्शनिक संवाद, शिवका पार्वतीको अपनी सेवाके लिये आज्ञा देना तथा पार्वतीद्वारा भगवान्‌की प्रतिदिन सेवा) (अध्याय 13) :-भवानीने कहा- योगिन् ! आपने तपस्वी होकर गिरिराजसे यह क्या बात कह डाली ? प्रभो ! आप … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 12 हिमवान्‌का पार्वतीको शिवकी सेवामें रखनेके लिये उनसे आज्ञा माँगना और शिवका कारण बताते हुए इस प्रस्तावको अस्वीकार कर देना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 12 हिमवान्‌का पार्वतीको शिवकी सेवामें रखनेके लिये उनसे आज्ञा माँगना और शिवका कारण बताते हुए इस प्रस्तावको अस्वीकार कर देना) (अध्याय 12) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! तदनन्तर शैलराज हिमालय उत्तम फल-फूल लेकर अपनी पुत्रीके साथ हर्षपूर्वक भगवान् … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 11 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 11 भगवान् शिवका गंगावतरण तीर्थमें तपस्याके लिये आना, हिमवान्द्वारा उनका स्वागत, पूजन और स्तवन तथा भगवान् शिवकी आज्ञाके अनुसार उनका उस स्थानपर दूसरोंको न जाने देनेकी व्यवस्था करना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 11 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 11 भगवान् शिवका गंगावतरण तीर्थमें तपस्याके लिये आना, हिमवान्द्वारा उनका स्वागत, पूजन और स्तवन तथा भगवान् शिवकी आज्ञाके अनुसार उनका उस स्थानपर दूसरोंको न जाने देनेकी व्यवस्था करना) (अध्याय 11) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! हिमवान्‌की पुत्री लोकपूजित … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 9 or 10 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 9 और 10 मेना और हिमालयकी बातचीत, पार्वती तथा हिमवान्‌के स्वप्न तथा भगवान् शिवसे ‘मंगल’ ग्रहकी उत्पत्तिका प्रसंग)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 9 or 10 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 9 और 10 मेना और हिमालयकी बातचीत, पार्वती तथा हिमवान्‌के स्वप्न तथा भगवान् शिवसे ‘मंगल’ ग्रहकी उत्पत्तिका प्रसंग) (अध्याय 9 और 10) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! जब तुम स्वर्गलोकको चले गये, तबसे कुछ काल और … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 7 or 8 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 7 और 8 पार्वतीका नामकरण और विद्याध्ययन, नारदका हिमवान्‌के यहाँ जाना, पार्वतीका हाथ देखकर भावी फल बताना, चिन्तित हुए हिमवान्‌को आश्वासन दे पार्वतीका विवाह शिवजीके साथ करनेको कहना और उनके संदेहका निवारण करना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 7 or 8 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 7 और 8 पार्वतीका नामकरण और विद्याध्ययन, नारदका हिमवान्‌के यहाँ जाना, पार्वतीका हाथ देखकर भावी फल बताना, चिन्तित हुए हिमवान्‌को आश्वासन दे पार्वतीका विवाह शिवजीके साथ करनेको कहना और उनके संदेहका निवारण करना) (अध्याय 7 … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 6 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 6 देवी उमाका हिमवान्‌के हृदय तथा मेनाके गर्भमें आना, गर्भस्था देवीका देवताओंद्वारा स्तवन, उनका दिव्यरूपमें प्रादुर्भाव, माता मेनासे बातचीत तथा नवजात कन्याके रूपमें परिवर्तित होना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 6 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 6 देवी उमाका हिमवान्‌के हृदय तथा मेनाके गर्भमें आना, गर्भस्था देवीका देवताओंद्वारा स्तवन, उनका दिव्यरूपमें प्रादुर्भाव, माता मेनासे बातचीत तथा नवजात कन्याके रूपमें परिवर्तित होना) (अध्याय 6) :-ब्रह्माजी कहते हैं- नारद ! तदनन्तर मेना और हिमालय आदरपूर्वक … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 5 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 5 मेनाको प्रत्यक्ष दर्शन देकर शिवादेवीका उन्हें अभीष्ट वरदानसे संतुष्ट करना तथा मेनासे मैनाकका जन्म)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 5 (शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 5 मेनाको प्रत्यक्ष दर्शन देकर शिवादेवीका उन्हें अभीष्ट वरदानसे संतुष्ट करना तथा मेनासे मैनाकका जन्म) (अध्याय 5) :-नारदजीने पूछा-पिताजी ! जब देवी दुर्गा अन्तर्धान हो गयीं और देवगण अपने-अपने धामको चले गये, उसके बाद क्या हुआ ? … Read more

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