Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 13 to 18 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 13 से 18 शिवाका अपनी मैलसे गणेशको उत्पन्न करके द्वारपाल-पदपर नियुक्त करना, गणेशद्वारा शिवजीके रोके जानेपर उनका शिवगणोंके साथ भयंकर संग्राम, शिवजीद्वारा गणेशका शिरश्छेदन, कुपित हुई शिवाका शक्तियोंको उत्पन्न करना और उनके द्वारा प्रलय मचाया जाना, देवताओं और ऋषियोंका स्तवनद्वारा पार्वतीको प्रसन्न करना, उनके द्वारा पुत्रको जिलाये जानेकी बात कही जानेपर शिवजीके आज्ञानुसार हाथीका सिर लाया जाना और उसे गणेशके धड़से जोड़कर उन्हें जीवित करना)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 13 to 18 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 13 से 18 शिवाका अपनी मैलसे गणेशको उत्पन्न करके द्वारपाल-पदपर नियुक्त करना, गणेशद्वारा शिवजीके रोके जानेपर उनका शिवगणोंके साथ भयंकर संग्राम, शिवजीद्वारा गणेशका शिरश्छेदन, कुपित हुई शिवाका शक्तियोंको उत्पन्न करना और उनके द्वारा प्रलय मचाया … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 9 to 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 9 से 12 ब्रह्माजीकी आज्ञासे कुमारका युद्धके लिये जाना, तारकके साथ उनका भीषण संग्राम और उनके द्वारा तारकका वध, तत्पश्चात् देवोंद्वारा कुमारका अभिनन्दन और स्तवन, कुमारका उन्हें वरदान देकर कैलासपर जा शिव-पार्वतीके पास निवास करना)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 9 to 12 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 9 से 12 ब्रह्माजीकी आज्ञासे कुमारका युद्धके लिये जाना, तारकके साथ उनका भीषण संग्राम और उनके द्वारा तारकका वध, तत्पश्चात् देवोंद्वारा कुमारका अभिनन्दन और स्तवन, कुमारका उन्हें वरदान देकर कैलासपर जा शिव-पार्वतीके पास निवास करना) … Read more

Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 1 to 8 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 1 से 8 देवताओंद्वारा स्कन्दका शिव-पार्वतीके पास लाया जाना, उनका लाड़- प्यार, देवोंके माँगनेपर शिवजीका उन्हें तारक-वधके लिये स्वामी कार्तिकको देना, कुमारकी अध्यक्षतामें देव-सेनाका प्रस्थान, महीसागर-संगमपर तारकासुरका आना और दोनों सेनाओंमें मुठभेड़, वीरभद्रका तारकके साथ घोर संग्राम, पुनः श्रीहरि और तारकमें भयानक युद्ध)

(रुद्रसंहिता, चतुर्थ (कुमार) खण्ड) Shiv puran rudra samhita kumar khand chapter 1 to 8 (शिव पुराण रुद्रसंहिता कुमार खंड अध्याय 1 से 8 देवताओंद्वारा स्कन्दका शिव-पार्वतीके पास लाया जाना, उनका लाड़- प्यार, देवोंके माँगनेपर शिवजीका उन्हें तारक-वधके लिये स्वामी कार्तिकको देना, कुमारकी अध्यक्षतामें देव-सेनाका प्रस्थान, महीसागर-संगमपर तारकासुरका आना और दोनों सेनाओंमें मुठभेड़, वीरभद्रका तारकके साथ … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 55(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 55 शिव-पार्वती तथा उनकी बारातकी विदाई, भगवान् शिवका समस्त देवताओंको विदा करके कैलासपर रहना और पार्वतीखण्डके श्रवणकी महिमा)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 55(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 55 शिव-पार्वती तथा उनकी बारातकी विदाई, भगवान् शिवका समस्त देवताओंको विदा करके कैलासपर रहना और पार्वतीखण्डके श्रवणकी महिमा) (अध्याय 55) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! ब्राह्मणीने देवी पार्वतीको पतिव्रत-धर्मकी शिक्षा देनेके पश्चात् मेनाको बुलाकर कहा – ‘महारानीजी ! अब … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 54(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 54 मेनाकी इच्छाके अनुसार एक ब्राह्मण-पत्नीका पार्वतीको पतिव्रतधर्मका उपदेश देना)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 54(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 54 मेनाकी इच्छाके अनुसार एक ब्राह्मण-पत्नीका पार्वतीको पतिव्रतधर्मका उपदेश देना) (अध्याय 54 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं- नारद ! तदनन्तर सप्तर्षियोंने हिमालयसे कहा- ‘गिरिराज ! अब आप अपनी पुत्री पार्वतीदेवीकी यात्राका उचित प्रबन्ध करें।’ मुनीश्वर ! यह सुनकर पार्वतीके … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 53(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 53 चतुर्थीकर्म, बारातका कई दिनोंतक ठहरना, सप्तर्षियोंके समझानेसे हिमालयका बारातको विदा करनेके लिये राजी होना, मेनाका शिवको अपनी कन्या सौंपना तथा बारातका पुरीके बाहर जाकर ठहरना)

रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 53(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 53 चतुर्थीकर्म, बारातका कई दिनोंतक ठहरना, सप्तर्षियोंके समझानेसे हिमालयका बारातको विदा करनेके लिये राजी होना, मेनाका शिवको अपनी कन्या सौंपना तथा बारातका पुरीके बाहर जाकर ठहरना) (अध्याय 53) :-ब्रह्माजी कहते हैं- तदनन्तर विष्णु आदि देवता तथा ऋषि कैलास … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 52(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 52 रातको परम सुन्दर सजे हुए वासगृहमें शयन करके प्रातःकाल भगवान् शिवका जनवासेमें आगमन)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 52(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 52 रातको परम सुन्दर सजे हुए वासगृहमें शयन करके प्रातःकाल भगवान् शिवका जनवासेमें आगमन) (अध्याय 52) :-ब्रह्माजी कहते हैं-तात ! तदनन्तर भाग्यवानोंमें श्रेष्ठ और चतुर गिरिराज हिमवान्ने बारातियोंको भोजन करानेके लिये अपने आँगनको सुन्दर ढंगसे सजाया तथा अपने … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 49 to 51(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 49 से 51 शिवके विवाहका उपसंहार, उनके द्वारा दक्षिणा-वितरण, वर-वधूका कोहबर और वासभवनमें जाना, वहाँ स्त्रियोंका उनसे लोकाचारका पालन कराना, रतिकी प्रार्थनासे शिवद्वारा कामको जीवनदान एवं वर-प्रदान, वर-वधूका एक-दूसरेको मिष्टान्न भोजन कराना और शिवका जनवासेमें लौटना)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 49 to 51(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 49 से 51 शिवके विवाहका उपसंहार, उनके द्वारा दक्षिणा-वितरण, वर-वधूका कोहबर और वासभवनमें जाना, वहाँ स्त्रियोंका उनसे लोकाचारका पालन कराना, रतिकी प्रार्थनासे शिवद्वारा कामको जीवनदान एवं वर-प्रदान, वर-वधूका एक-दूसरेको मिष्टान्न भोजन कराना और शिवका जनवासेमें लौटना) … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 48(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 48 शिव-पार्वतीके विवाहका आरम्भ, हिमालयके द्वारा शिवके गोत्रके विषयमें प्रश्न होनेपर नारदजीके द्वारा उत्तर, हिमालयका कन्यादान करके शिवको दहेज देना तथा शिवाका अभिषेक)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 48(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 48 शिव-पार्वतीके विवाहका आरम्भ, हिमालयके द्वारा शिवके गोत्रके विषयमें प्रश्न होनेपर नारदजीके द्वारा उत्तर, हिमालयका कन्यादान करके शिवको दहेज देना तथा शिवाका अभिषेक) (अध्याय 48 ) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! इसी समय वहाँ गर्गाचार्यसे प्रेरित हो मेनासहित हिमवान्ने … Read more

Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 47(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 47 वरपक्षके आभूषणोंसे विभूषित शिवाकी नीराजना, कन्यादानके समय वरके साथ सब देवताओंका हिमाचलके घरके आँगनमें विराजना तथा वर-वधूके द्वारा एक-दूसरेका पूजन)

(रुद्रसंहिता, तृतीय (पार्वती) खण्ड) Shiv puran rudra samhita Parwati khand chapter 47(शिव पुराण रुद्रसंहिता पार्वती खंड अध्याय 47 वरपक्षके आभूषणोंसे विभूषित शिवाकी नीराजना, कन्यादानके समय वरके साथ सब देवताओंका हिमाचलके घरके आँगनमें विराजना तथा वर-वधूके द्वारा एक-दूसरेका पूजन) (अध्याय 47) :-ब्रह्माजी कहते हैं-नारद ! तदनन्तर साथ वेदमन्त्रोंद्वारा दुर्गा और शिवका उपस्नान गिरिश्रेष्ठ हिमवान्‌ने प्रसन्नता और … Read more

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