Shiv puran shatrudra samhita chapter 33 to 38 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 33 से 38 शिवजीके किरातावतारके प्रसंगमें श्रीकृष्णद्वारा द्वैतवनमें दुर्वासाके शापसे पाण्डवोंकी रक्षा, व्यासजीका अर्जुनको शक्रविद्या और पार्थिवपूजनकी विधि बताकर तपके लिये सम्मति देना, अर्जुनका इन्द्रकील पर्वतपर तप, इन्द्रका आगमन और अर्जुनको वरदान, अर्जुनका शिवजीके उद्देश्यसे पुनः तपमें प्रवृत्त होना)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 33 to 38 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 33 से 38 शिवजीके किरातावतारके प्रसंगमें श्रीकृष्णद्वारा द्वैतवनमें दुर्वासाके शापसे पाण्डवोंकी रक्षा, व्यासजीका अर्जुनको शक्रविद्या और पार्थिवपूजनकी विधि बताकर तपके लिये सम्मति देना, अर्जुनका इन्द्रकील पर्वतपर तप, इन्द्रका आगमन और अर्जुनको वरदान, अर्जुनका शिवजीके उद्देश्यसे पुनः तपमें प्रवृत्त होना) :-तदनन्तर पार्वतीके विवाहप्रसंगमें … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 32 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 32 शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 32 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 32 शिवके सुरेश्वरावतारकी कथा, उपमन्युकी तपस्या और उन्हें उत्तम वरकी प्राप्ति) :-नन्दीश्वर कहते हैं- सनत्कुमारजी ! अब मैं परमात्मा शिवके सुरेश्वरावतारका वर्णन करूँगा, जिन्होंने धौम्यके बड़े भाई उपमन्युका हितसाधन किया था। उपमन्यु व्याघ्घ्रपाद मुनिके पुत्र थे। उन्होंने पूर्वजन्ममें ही सिद्धि प्राप्त कर ली थी … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 31 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 31 भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 31 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 31 भगवान् शिवके भिक्षुवर्यावतारकी कथा, राजकुमार और द्विजकुमारपर कृपा) :-नन्दीश्वर कहते हैं-मुनिश्रेष्ठ ! अब तुम भगवान् शम्भुके नारी-संदेहभंजक भिक्षु- अवतारका वर्णन सुनो, जिसे उन्होंने अपने भक्तपर दया करके ग्रहण किया था। विदर्भ देशमें सत्यरथ नामसे प्रसिद्ध एक राजा थे, जो धर्ममें तत्पर, सत्यशील और … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 30 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 30 भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 30 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 30 भगवान् शिवके अवधूतेश्वरावतारकी कथा और उसकी महिमाका वर्णन) :-नन्दीश्वर कहते हैं-सनत्कुमार ! अब तुम परमेश्वर शिवके अवधूतेश्वर नामक अवतारका वर्णन सुनो, जिसने इन्द्रके घमंडको चूर-चूर कर दिया था। पहलेकी बात है, इन्द्र सम्पूर्ण देवताओं तथा बृहस्पतिजीको साथ लेकर भगवान् शिवका दर्शन करनेके लिये … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 29 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 29 भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 29 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 29 भगवान् शिवके कृष्णदर्शन नामक अवतारकी कथा) :-नन्दीश्वर कहते हैं- सनत्कुमारजी ! भगवान् शम्भुके एक उत्तम अवतारका नाम कृष्णदर्शन है, जिसने राजा नभगको ज्ञान प्रदान किया था। उसका वर्णन करता हूँ, सुनो। श्राद्धदेव नामक मनुके जो इक्ष्वाकु आदि पुत्र थे, उनमें नवमका नाम नभग … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 28  शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 28 भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 28  (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 28 भगवान् शिवका यतिनाथ एवं हंस नामक अवतार) :-नन्दीश्वर कहते हैं- मुने ! अब मैं परमात्मा शिवके यतिनाथ नामक अवतारका वर्णन करता हूँ। मुनीश्वर ! अर्बुदाचल नामक पर्वतके समीप एक भील रहता था, जिसका नाम था आहुक। उसकी पत्नीको लोग आहुका कहते थे। वह … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 26 or 27 शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 26 और 27 भगवान् शिवके द्विजेश्वरावतारकी कथा – राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनीकी धार्मिक दृढ़ताकी परीक्षा)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 26 or 27 शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय 26 और 27 भगवान् शिवके द्विजेश्वरावतारकी कथा – राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनीकी धार्मिक दृढ़ताकी परीक्षा)   :-तदनन्तर वैश्यनाथ अवतारका वर्णन करके नन्दीश्वरने द्विजेश्वरावतारका प्रसंग चलाया। वे बोले- तात ! पहले जिन नृपश्रेष्ठ भद्रायुका परिचय दिया गया था और जिनपर भगवान् शिवने … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 21 to 25 शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय21 से 25 शिवजीके पिप्पलाद-अवतारके प्रसंगमें देवताओंकी दधीचि मुनिसे अस्थि-याचना, दधीचिका शरीरत्याग, वज्र-निर्माण तथा उसके द्वारा वृत्रासुरका वध, सुवर्चाका देवताओंको शाप, पिप्पलादका जन्म और उनका विस्तृत वृत्तान्त)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 21 to 25 शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अअध्याय21 से 25 शिवजीके पिप्पलाद-अवतारके प्रसंगमें देवताओंकी दधीचि मुनिसे अस्थि-याचना, दधीचिका शरीरत्याग, वज्र-निर्माण तथा उसके द्वारा वृत्रासुरका वध, सुवर्चाका देवताओंको शाप, पिप्पलादका जन्म और उनका विस्तृत वृत्तान्त)   :-तदनन्तर महेशावतार तथा वृषेशावतारका चरित सुनाकर नन्दीश्वरने कहा- महाबुद्धिमान् सनत्कुमारजी ! अब तुम अत्यन्त आह्लादपूर्वक … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 19 or 20  शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 19 और 20 शिवजीके ‘दुर्वासावतार’ तथा ‘हनुमदवतार’ का वर्णन)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 19 or 20  शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 19 और 20 शिवजीके ‘दुर्वासावतार’ तथा ‘हनुमदवतार’ का वर्णन)    :-नन्दीश्वरजी कहते हैं- महामुने ! अब तुम शम्भुके एक दूसरे चरितको, जिसमें शंकरजी धर्मके लिये दुर्वासा होकर प्रकट हुए थे, प्रेमपूर्वक श्रवण करो। अनसूयाके पति ब्रह्मवेत्ता तपस्वी अत्रिने ब्रह्माजीके निर्देशानुसार पत्नीसहित ऋक्षकुल … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 16 to 18 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 16 से  18 शिवजीके महाकाल आदि दस अवतारोंका तथा ग्यारह रुद्र-अवतारोंका वर्णन)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 16 to 18 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 16 से  18 शिवजीके महाकाल आदि दस अवतारोंका तथा ग्यारह रुद्र-अवतारोंका वर्णन)   :-तदनन्तर यक्षेश्वरावतारकी बात कहकर नन्दीश्वरने कहा-मुने ! अब शंकरजीके उपासनाकाण्डद्वारा सेवित महाकाल आदि दस अवतारोंका वर्णन भक्तिपूर्वक श्रवण करो। उनमें पहला अवतार ‘महाकाल’ नामसे प्रसिद्ध है, जो सत्पुरुषोंको भोग … Read more

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