(Shiv puran kotirudra samhita chapter 18 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 18  विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 18 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 18  विन्ध्यकी तपस्या, ओंकारमें परमेश्वरलिंगके प्रादुर्भाव और उसकी महिमाका वर्णन) ऋषियोंने कहा- महाभाग सूतजी ! आपने अपने भक्तकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक शिवलिंगकी बड़ी अद्भुत कथा सुनायी है। अब कृपा करके चौथे ज्योतिर्लिंगका परिचय दीजिये – ओंकार- तीर्थमें सर्वपातकहारी परमेश्वरका जो ज्योतिर्लिंग है, उसके … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 17 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 17 महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 17 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 17 महाकालके माहात्म्यके प्रसंगमें शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकरकी कथा) :-सूतजी कहते हैं-ब्राह्मणो ! भक्तोंकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक ज्योति- लिंगका माहात्म्य भक्तिभावको बढ़ानेवाला है। उसे आदरपूर्वक सुनो। उज्जयिनीमें चन्द्रसेन नामक एक महान् राजा थे, जो सम्पूर्ण शास्त्रोंके तत्त्वज्ञ, शिवभक्त और जितेन्द्रिय थे। … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 15 or 16 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 15 से 16 मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 15 or 16 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 15 और 16 मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनकी महिमा) :-सूतजी कहते हैं-महर्षियो ! अब मैं मल्लिकार्जुनके प्रादुर्भावका प्रसंग सुनाता हूँ, जिसे सुनकर बुद्धिमान् पुरुष सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। जब महाबली तारकशत्रु शिवापुत्र कुमार कार्तिकेय सारी पृथ्वीकी … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 8 to 14 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 8 से 14 प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 8 to 14 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 8 से 14 प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और उसकी महिमा) :-तदनन्तर कपिला नगरीके कालेश्वर, रामेश्वर आदिकी महिमा बताते हुए सूतजीने समुद्रके तटपर स्थित गोकर्णक्षेत्रके शिवलिंगोंकी महिमाका वर्णन किया। फिर महाबल नामक शिवलिंगका अद्भुत माहात्म्य सुनाकर अन्य बहुत-से शिवलिंगोंकी विचित्र माहात्म्य-कथाका वर्णन … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 5 to 7 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 5 से 7 ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें ‘नन्दिकेश’ नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 5 to 7 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 5 से 7 ऋषिकापर भगवान् शिवकी कृपा, एक असुरसे उसके धर्मकी रक्षा करके उसके आश्रममें ‘नन्दिकेश’ नामसे निवास करना और वर्षमें एक दिन गंगाका भी वहाँ आना) :-तदनन्तर श्रीसूतजीने जब बहुत-से शिवलिंगोंके कथाप्रसंग सुना दिये, तब ऋषियोंने पूछा- ‘महामते सूतजी ! वैशाख … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 2 to 4 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 2 काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 2 to 4 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 2 से 4 काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वरकी उत्पत्तिके प्रसंगमें गंगा और शिवके अत्रिके तपोवनमें नित्य निवास करनेकी कथा)  :-सूतजी कहते हैं-मुनीश्वरो ! गंगाजीके तटपर मुक्तिदायिनी काशीपुरी सुप्रसिद्ध है। वह भगवान् शिवकी निवासस्थली मानी गयी है। उसे शिवलिंगमयी ही समझना … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 1 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 1 द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 1 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 1 द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगोंका वर्णन एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा)   “यो धत्ते निजमाययैव भुवनाकारं विकारोज्झितो यस्याहुः करुणाकटाक्षविभवौ स्वर्गापवर्गाभिधौ । प्रत्यग्बोधसुखाद्वयं हृदि सदा पश्यन्ति यं योगिन- स्तस्मै शैलसुताञ्चितार्द्धवपुषे शश्वन्नमस्तेजसे ॥ १ ॥” “जो निर्विकार होते हुए भी अपनी मायासे ही विराट् विश्वका आकार … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 42 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 42 शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन)

शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 42 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 42 शिवजीके द्वादश ज्योतिर्लिंगावतारोंका सविस्तर वर्णन)   :-नन्दीश्वरजी कहते हैं-मुने ! अब तुम सर्वव्यापी भगवान् शंकरके बारह अन्य ज्योतिर्लिंगस्वरूपी अवतारोंका वर्णन श्रवण करो, जो अनेक प्रकारके मंगल करनेवाले हैं। (उनके नाम ये हैं-) सौराष्ट्रमें सोमनाथ, श्रीशैलपर मल्लिकार्जुन, उज्जयिनीमें महाकाल, ओंकारमें अमरेश्वर, हिमालयपर केदार, डाकिनीमें … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 40 or 41 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 40 और 41 अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 40 or 41 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 40 और 41 अर्जुन और शिवदूतका वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजीके साथ अर्जुनका युद्ध, पहचाननेपर अर्जुनद्वारा शिव-स्तुति, शिवजीका अर्जुनको वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुनका आश्रमपर लौटकर भाइयोंसे मिलना, श्रीकृष्णका अर्जुनसे मिलनेके लिये वहाँ पधारना) :-नन्दीश्वरजी कहते हैं- महाज्ञानी सनत्कुमारजी ! अब परमात्मा शिवकी उस … Read more

Shiv puran shatrudra samhita chapter 39 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 39 किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध)

(शतरुद्रसंहिता) Shiv puran shatrudra samhita chapter 39 (शिव पुराण शतरुद्रसंहिता अध्याय 39 किरातावतारके प्रसंगमें मूक नामक दैत्यका शूकररूप धारण करके अर्जुनके पास आना, शिवजीका किरातवेषमें प्रकट होना और अर्जुन तथा किरातवेषधारी शिवद्वारा उस दैत्यका वध) :-नन्दीश्वरजी कहते हैं-मुने ! तदनन्तर अर्जुन व्यासजीके उपदेशानुसार विधिपूर्वक स्नान तथा न्यास आदि करके परम भक्तिके साथ शिवजीका ध्यान करने … Read more

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