Shiv puran kotirudra samhita chapter 34  (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 34 शंकरजीकी आराधनासे भगवान् विष्णुको सुदर्शन चक्रकी प्राप्ति तथा उसके द्वारा दैत्योंका संहार)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 34  (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 34 शंकरजीकी आराधनासे भगवान् विष्णुको सुदर्शन चक्रकी प्राप्ति तथा उसके द्वारा दैत्योंका संहार) व्यासजी कहते हैं-सूतका यह वचन सुनकर उन मुनीश्वरोंने उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करके लोकहितकी कामनासे इस प्रकार कहा। ऋषि बोले- सूतजी ! आप सब जानते हैं। इसलिये हम आपसे पूछते हैं। प्रभो … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 32 or 33 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 32 और 33 घुश्माकी शिवभक्तिसे उसके मरे हुए पुत्रका जीवित होना, घुश्मेश्वर शिवका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमाका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 32 or 33 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 32 और 33 घुश्माकी शिवभक्तिसे उसके मरे हुए पुत्रका जीवित होना, घुश्मेश्वर शिवका प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमाका वर्णन) :’सूतजी कहते हैं-अब मैं घुश्मेश नामक ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भावका और उसके माहात्म्यका वर्णन करूँगा। मुनिवरो ! ध्यान देकर सुनो। दक्षिणदिशामें एक श्रेष्ठ पर्वत है, जिसका … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 31 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 31 रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 31 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 31 रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके आविर्भाव तथा माहात्म्यका वर्णन) :-सूतजी कहते हैं-ऋषियो ! अब मैं यह बता रहा हूँ कि रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग पहले किस प्रकार प्रकट हुआ। इस प्रसंगको तुम आदरपूर्वक सुनो। भगवान् विष्णुके रामावतारमें जब रावण सीताजीको हरकर लंकामें ले गया, तब सुग्रीवके … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 29 or 30 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 29 और 30  नागेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका प्रादुर्भाव और उसकी महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 29 or 30 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 29 और 30  नागेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका प्रादुर्भाव और उसकी महिमा) :-सूतजी कहते हैं-ब्राह्मणो ! अब मैं परमात्मा शिवके नागेश नामक परम उत्तम ज्योतिर्लिंगके आविर्भावका प्रसंग सुनाऊँगा। दारुका नामसे प्रसिद्ध कोई राक्षसी थी, जो पार्वतीके वरदानसे सदा घमंडमें भरी रहती थी। अत्यन्त बलवान् … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 27 or 28 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 27 और 28 वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यकी कथा तथा महिमा)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 27 or 28 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 27 और 28 वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्यकी कथा तथा महिमा) :-सूतजी कहते हैं-अब मैं वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगका पापहारी माहात्म्य बताऊँगा। सुनो ! राक्षसराज रावण जो बड़ा अभिमानी और अपने अहंकारको प्रकट करनेवाला था, उत्तम पर्वत कैलासपर भक्तिभावसे भगवान् शिवकी आराधना कर रहा था। कुछ … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 26 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 26 पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना,)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 26 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 26 पत्नीसहित गौतमकी आराधनासे संतुष्ट हो भगवान् शिवका उन्हें दर्शन देना, गंगाको वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना,) :-देवताओंका वहाँ बृहस्पतिके सिंहराशिपर आनेपर गंगाजीके विशेष माहात्म्यको स्वीकार करना, गंगाका गौतमी (या गोदावरी) नामसे और शिवका त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके नामसे विख्यात होना तथा इन दोनोंकी … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 24 to 25 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 24 और 25 त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय,)

(कोटिरुद्रसंहिता) Shiv puran kotirudra samhita chapter 24 or 25 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 24 और 25 त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंगके प्रसंगमें महर्षि गौतमके द्वारा किये गये परोपकारकी कथा, उनका तपके प्रभावसे अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियोंकी अनावृष्टिके कष्टसे रक्षा करना; ऋषियोंका छलपूर्वक उन्हें गोहत्यामें फँसाकर आश्रमसे निकालना और शुद्धिका उपाय,) :-सूतजी कहते हैं-मुनिवरो ! सुनो, मैंने सद्गुरु … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 23 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 23 वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 23 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 23 वाराणसी तथा विश्वेश्वरका माहात्म्य) :-सूतजी कहते हैं-मुनीश्वरो ! मैं संक्षेपसे ही वाराणसी तथा विश्वेश्वरके परम सुन्दर माहात्म्यका वर्णन करता हूँ, सुनो। एक समयकी बात है कि पार्वतीदेवीने लोक- हितकी कामनासे बड़ी प्रसन्नताके साथ भगवान् शिवसे अविमुक्त क्षेत्र और अविमुक्त लिंगका माहात्म्य पूछा। तब … Read more

(Shiv puran kotirudra samhita chapter 22 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 22 विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 22 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 22 विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन) :-सूतजी कहते हैं-मुनिवरो ! अब मैं काशीके विश्वेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगका माहात्म्य बताऊँगा, जो महापातकोंका भी नाश करनेवाला है। तुमलोग सुनो, इस भूतलपर जो कोई भी वस्तु दृष्टिगोचर होती है, वह सच्चिदानन्दस्वरूप, निर्विकार एवं सनातन … Read more

Shiv puran kotirudra samhita chapter 19 to 21 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 19 से 21 केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन)

(कोटिरुद्रसंहिता) (Shiv puran kotirudra samhita chapter 19 to 21 (शिव पुराण  कोटिरुद्रसंहिता अध्याय 19 से 21 केदारेश्वर तथा भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंगोंके आविर्भावकी कथा तथा उनके माहात्म्यका वर्णन) :-सूतजी कहते हैं-ब्राह्मणो ! भगवान् विष्णुके जो नर-नारायण नामक दो अवतार हैं और भारतवर्षके बदरिकाश्रमतीर्थमें तपस्या करते हैं, उन दोनोंने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसमें स्थित हो पूजा ग्रहण … Read more

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