अष्टावक्र गीता अध्याय 10- :-Ashtavakra geeta chapter 10.
अष्टावक्र गीताअध्याय 10- :-Ashtavakra geeta chapter 10. (अध्याय10) अष्टावक्र उवाच – विहाय वैरिणं कामम- र्थं चानर्थसंकुलं। धर्ममप्येतयोर्हेतुं सर्वत्रानादरं कुरु॥१०- १॥ श्री अष्टावक्र कहते हैं – कामना और अनर्थों के समूह धन रूपी शत्रुओं को त्याग दो, इन दोनों के त्याग रूपी धर्म से युक्त होकर सर्वत्र विरक्त (उदासीन) हो जाओ॥१॥ Sri Ashtavakra says – … Read more