Shrimad devi bhagwat puran mahima chapter 1 (देवी भागवत पुराण महिमा प्रथमोऽध्यायः सूतजीके द्वारा ऋषियोंके प्रति श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणकी महिमाका कथन )

॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ [श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम्] Shrimad devi bhagwat puran mahima chapter 1 (श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्यम्  प्रथमोऽध्यायः सूतजीके द्वारा ऋषियोंके प्रति श्रीमद्देवीभागवतके श्रवणकी महिमाका कथन ) जगत्के सृष्टिकार्यमें जो उत्पत्तिरूपा, रक्षाकार्यमें पालनशक्तिरूपा, संहारकार्यमें रौद्ररूपा हैं, सम्पूर्ण विश्व-प्रपंच जिनके लिये क्रीडास्वरूप है, जो परा- पश्यन्ती-मध्यमा तथा वैखरी वाणीमें अभिव्यक्त होती हैं … Read more

Bhavanyashtakam(भवान्यष्टकम्)

[ अथ भवान्यष्टकम्] (Bhavanyashtakam)   -हे भवानि ! पिता, माता, भाई, दाता, पुत्र, पुत्री, भृत्य, स्वामी, स्त्री, विद्या और वृत्ति-इनमेंसे कोई भी मेरा नहीं है, हे देवि ! एकमात्र तुम्हीं मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो ॥ १ ॥ मैं अपार भवसागरमें पड़ा हुआ हूँ, महान् दुःखोंसे भयभीत हूँ; कामी, लोभी, मतवाला तथा संसारके … Read more

Ardhasloki Devi Bhagwat(अर्धश्लोकी देवीभागवत)

Ardhasloki Devi Bhagwat(अर्धश्लोकी देवीभागवत) [अर्धश्लोकी देवीभागवत]   जिस प्रकार सप्तश्लोकी दुर्गा, सप्तश्लोकी गीता, पंचश्लोकी गणेशपुराण, चतुःश्लोकी भागवत, एकश्लोकी भागवत, एकश्लोकी रामायण, एकश्लोकी योगवासिष्ठ, सार्धश्लोकी दुर्गा तथा एकश्लोकी महाभारत प्राप्त होता है; उसी प्रकार अर्धश्लोकी देवीभागवत भी प्राप्त होता है,जो तात्त्विक दृष्टिसे बड़े ही महत्त्वका है। पुराण-वाङ्मयमें देवीभागवतका अत्यन्त महनीय स्थान है। इसमें भगवती जगदम्बाका पराशक्तिके … Read more

Devi Bhagwat importance (श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य)

[श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य] (Devi Bhagwat importance )   श्रीमद्देवीभागवत नामक पुराण सभी पुराणोंमें अतिश्रेष्ठ है, जिसमें तीनों लोकोंकी जननी साक्षात् सनातनी भगवतीकी महिमा गायी गयी है। जो श्रीमद्देवीभागवतके आधे श्लोक या चौथाई श्लोकको भी प्रतिदिन सुनता या पढ़ता है, वह परमगतिको प्राप्त होता है। जिस घरमें नित्य श्रीमद्देवीभागवतग्रन्थका पूजन किया जाता है, वह घर तीर्थस्वरूप हो जाता … Read more

Devi Bhagwat introduction(देवी भागवत प्रस्तावना)

देवी भागवत प्रस्तावना(Devi Bhagwat introduction) देवी भागवत पुराण, जिसे देवी भागवतम, भागवत पुराण, श्रीमद भागवतम और श्रीमद देवी भागवतम के नाम से भी जाना जाता है, देवी भगवती आदिशक्ति माँ दुर्गा जी को समर्पित एक महा पाठ है और हिंदू धर्म के अठारह प्रमुख महा पुराणों में से एक है जोकि महर्षि वेद व्यास जी … Read more

Bhagwat puran skandh 8 chapter 24(भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय चौबीस भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा)

Bhagwat puran skandh 8 chapter 24(भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय चौबीस भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा) (संस्कृत श्लोक: -)   राजोवाच भगवञ्छ्रोतुमिच्छामि हरेरद्भुतकर्मणः । अवतारकथामाद्यां मायामत्स्यविडम्बनम् ।।१ यदर्थमदधाद् रूपं मात्स्यं लोकजुगुप्सितम् । तमः प्रकृति दुर्मर्ष कर्मग्रस्त इवेश्वरः ।।२ एतन्नो भगवन् सर्वं यथावद् वक्तुमर्हसि । उत्तमश्लोकचरितं सर्वलोकसुखावहम् ।।३ सूत उवाच इत्युक्तो विष्णुरातेन भगवान् बादरायणिः । उवाच चरितं विष्णोर्मत्स्यरूपेण यत् … Read more

Bhagwat puran skandh 8 chapter 23 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय तेइस बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना)

Bhagwat puran skandh 8 chapter 23 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय तेइस बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना) (संस्कृत श्लोक: -)   श्रीशुक उवाच इत्युक्तवन्तं पुरुषं पुरातनं महानुभावोऽखिलसाधुसंमतः । बद्धाञ्जलिर्बाष्पकलाकुलेक्षणो भक्त्युद्गलो गद्गदया गिराब्रवीत् ।।१   बलिरुवाच अहो प्रणामाय कृतः समुद्यमः प्रपन्नभक्तार्थविधौ समाहितः । यल्लोकपालैस्त्वदनुग्रहोऽमरै- रलब्धपूर्वोऽपसदेऽसुरेऽर्पितः ।।२ श्रीशुक उवाच इत्युक्त्वा हरिमानम्य ब्रह्माणं सभवं ततः । विवेश सुतलं प्रीतो … Read more

Bhagwat puran skandh 8 chapter 22 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय बाइश बलिके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्‌का उसपर प्रसन्न होना)

Bhagwat puran skandh 8 chapter 22 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय बाइश बलिके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्‌का उसपर प्रसन्न होना) (संस्कृत श्लोक: -)   श्रीशुक उवाच एवं विप्रकृतो राजन् बलिर्भगवतासुरः । भिद्यमानोऽप्यभिन्नात्मा प्रत्याहाविक्लवं वचः ।।१ बलिरुवाच यद्युत्तमश्लोक भवान् ममेरितं वचो व्यलीकं सुरवर्य मन्यते । करोम्यूतं तन्न भवेत् प्रलम्भनं पदं तृतीयं कुरु शीष्णि मे निजम् ।।२ … Read more

Bhagwat puran skandh 8 chapter 21 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय इक्कीस बलिका बाँधा जाना)

Bhagwat puran skandh 8 chapter 21 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय इक्कीस बलिका बाँधा जाना) (संस्कृत श्लोक: -)   श्रीशुक उवाच त्यं समीक्ष्याब्जभवो नखेन्दुभि- र्हतस्वधामद्युतिरावृतोऽभ्यगात् । मरीचिमिश्रा ऋषयो बृहद्वताः सनन्दनाद्या नरदेव योगिनः ।।१ वेदोपवेदा नियमान्विता यमा- स्तर्केतिहासाङ्गपुराणसंहिताः । ये चापरे योगसमीरदीपित- ज्ञानाग्निना रन्धितकर्मकल्मषाः । ववन्दिरे यत्स्मरणानुभावतः स्वायम्भुवं धाम गता अकर्मकम् ।।२ अथाङ्ङ्घये प्रोन्नमिताय विष्णो- रुपाहरत् पद्मभवोऽर्हणोदकम् … Read more

Bhagwat puran skandh 8 chapter 20 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय बीस भगवान् वामनजीका विरारूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना)

Bhagwat puran skandh 8 chapter 20 (भागवत पुराण अष्टम: स्कन्ध:अध्याय बीस भगवान् वामनजीका विरारूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना) (संस्कृत श्लोक: -)   श्रीशुक उवाच बलिरेवं गृहपतिः कुलाचार्येण भाषितः । तूष्णीं भूत्वा क्षणं राजन्नुवाचावहितो गुरुम् ।।१ बलिरुवाच सत्यं भगवता प्रोक्तं धर्मोऽयं गृहमेधिनाम् । अर्थ कामं यशो वृत्तिं यो न बाधेत कर्हिचित् … Read more

error: Content is protected !!