Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 16(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कंध:षोडशोऽध्यायःबालरूपधारी भगवान् विष्णुसे महालक्ष्मीका संवाद, व्यासजीका शुकदेवजीसे देवीभागवतप्राप्तिकी परम्परा बताना तथा शुकदेवजीका मिथिला जानेका निश्चय करना)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 16(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कंध:षोडशोऽध्यायःबालरूपधारी भगवान् विष्णुसे महालक्ष्मीका संवाद, व्यासजीका शुकदेवजीसे देवीभागवतप्राप्तिकी परम्परा बताना तथा शुकदेवजीका मिथिला जानेका निश्चय करना) [अथ षोडशोऽध्यायः]   -व्यासजी बोले- इस प्रकार वटपत्रपर सोये हुए उन भगवान् विष्णुको आश्चर्यचकित देखकर मन्द मुसकान करती हुई देवीने यह वचन कहा- ‘विष्णो ! आप विस्मयमें क्यों पड़े … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 15 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कंध: पञ्चदशोऽध्यायः शुकदेवजीका विवाहके लिये अस्वीकार करना तथा व्यासजीका उनसे श्रीमद्देवीभागवत पढ़नेके लिये कहना)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 15 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कंध:पञ्चदशोऽध्यायःशुकदेवजीका विवाहके लिये अस्वीकार करना तथा व्यासजीका उनसे श्रीमद्देवीभागवत पढ़नेके लिये कहना) (अथ पञ्चदशोऽध्यायः) -श्रीशुकदेवजी बोले- हे पिताजी ! सर्वदा दुःख देनेवाले गृहस्थाश्रमको मैं कभी स्वीकार नहीं करूँगा; क्योंकि [पशु-पक्षियोंको फँसानेवाले] जालके समान यह आश्रम सभी मानवोंके लिये सदा बन्धनस्वरूप है ॥ १ ॥ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 14 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:चतुर्दशोऽध्यायःव्यासपुत्र शुकदेवके अरणिसे उत्पन्न होनेकी कथा तथा व्यासजीद्वारा उनसे गृहस्थधर्मका वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 14 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:चतुर्दशोऽध्यायःव्यासपुत्र शुकदेवके अरणिसे उत्पन्न होनेकी कथा तथा व्यासजीद्वारा उनसे गृहस्थधर्मका वर्णन) [अथ चतुर्दशोऽध्यायः] :-सूतजी बोले- उस सुन्दरी असितापांगी घृताचीको देखकर व्यासजी बड़े असमंजसमें पड़े और सोचने लगे कि यह देवकन्या अप्सरा मेरे योग्य नहीं है, अतः अब मैं क्या करूँ ? वह अप्सरा भी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 13(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:त्रयोदशोऽध्यायः राजा पुरूरवा और उर्वशीकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 13(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:त्रयोदशोऽध्यायः राजा पुरूरवा और उर्वशीकी कथा) [अथ त्रयोदशोऽध्यायः]   :-सूतजी बोले – सुद्युम्नके दिवंगत हो जानेपर प्रजानुरंजनमें तत्पर, गुणी एवं सुन्दर महाराज पुरूरवा राज्य करने लगे। उस रमणीय प्रतिष्ठानपुरमें सर्वधर्मज्ञ तथा प्रजाकी रक्षामें तत्पर राजा पुरूरवाने सभीके द्वारा आदरणीय राज्य किया ॥ १-२ ॥ उनकी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 12(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:द्वादशोऽध्यायः राजा सुद्युम्नकी इला नामक स्त्रीके रूपमें परिणति, इलाका बुधसे विवाह और पुरूरवाकी उत्पत्ति, भगवतीकी स्तुति करनेसे इलारूपधारी राजा सुद्युम्नकी सायुज्यमुक्ति)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 12(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:द्वादशोऽध्यायःराजा सुद्युम्नकी इला नामक स्त्रीके रूपमें परिणति, इलाका बुधसे विवाह और पुरूरवाकी उत्पत्ति, भगवतीकी स्तुति करनेसे इलारूपधारी राजा सुद्युम्नकी सायुज्यमुक्ति)   [अथ द्वादशोऽध्यायः] :-सूतजी बोले – तदनन्तर इलाके गर्भसे पुरूरवाने जन्म लिया, यह प्रसंग मैं आपलोगोंसे कहता हूँ। वे बुधपुत्र पुरूरवा बड़े धर्मात्मा, यज्ञ करनेवाले … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 11(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:एकादश अध्याय: बुधके जन्मकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 11(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:एकादश अध्याय: बुधके जन्मकी कथा) [अथैकादशोऽध्यायः] ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! वे राजा पुरूरवा कौन थे तथा वह देवकन्या उर्वशी कौन थी ? उस मनस्वी राजाने किस प्रकार संकट प्राप्त किया ? ॥ १ ॥ हे लोमहर्षणतनय ! आप इस समय पूरा कथानक विस्तारपूर्वक कहें। … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 10(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:दशमोऽध्यायःव्यासजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 10(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध: दशमोऽध्यायःव्यासजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति अथ दशमोऽध्याय -ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! आपने हमें पहले ही बतला दिया है कि असीम तेजवाले व्यासजीने कल्याणकारी समस्त पुराणोंकी रचना करके उन्हें शुकदेवजीको पढ़ाया ॥ १ ॥ व्यासजीने घोर तप करके शुकदेवजीको किस प्रकार पुत्ररूपमें प्राप्त किया? व्यासजीके मुखसे … Read more

Devi Bhagwat puran skandh 1 chapter 9(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:नवमोऽध्यायःभगवान् विष्णुका मधु-कैटभसे पाँच हजार वर्षांतक युद्ध करना, विष्णुद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा मोहित मधु-कैटभका विष्णद्वारा वध)

Devi Bhagwat puran skandh 1 chapter 9(देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:नवमोऽध्यायःभगवान् विष्णुका मधु-कैटभसे पाँच हजार वर्षांतक युद्ध करना, विष्णुद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा मोहित मधु-कैटभका विष्णद्वारा वध)  [अथ नवमोऽध्यायः] सूतजी बोले- [हे मुनिजनो !] जब जगद्‌गुरु भगवान् विष्णुके शरीरसे निद्रादेवी निकलीं; उस समय उनके नेत्र, मुख, नासिका, भुजा, हृदय तथा वक्षःस्थलसे निकलकर वे श्रेष्ठ तामसी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 8 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:अथाष्टमोऽध्यायःभगवान् विष्णु योगमायाके अधीन क्यों हो गये – ऋषियोंके इस प्रश्नके उत्तरमें सूतजीद्वारा उन्हें आद्याशक्ति भगवतीकी महिमा सुनाना)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 8 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:अथाष्टमोऽध्यायःभगवान् विष्णु योगमायाके अधीन क्यों हो गये – ऋषियोंके इस प्रश्नके उत्तरमें सूतजीद्वारा उन्हें आद्याशक्ति भगवतीकी महिमा सुनाना) [अथाष्टमोऽध्यायः]   -ऋषिगण बोले- हे महाभाग ! हमें इस कथानकमें महान् अद्भुत संशय है। हे महामते ! वेदों, शास्त्रों, पुराणों तथा बुद्धिमान् लोगोंकी सदासे यह अवधारणा … Read more

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 7 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:सप्तमोऽध्यायःब्रह्माजीका भगवान् विष्णु तथा भगवती योगनिद्राकी स्तुति करना)

Devi bhagwat puran skandh 1 chapter 7 (देवी भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध:सप्तमोऽध्यायःब्रह्माजीका भगवान् विष्णु तथा भगवती योगनिद्राकी स्तुति करना) [अथ सप्तमोऽध्यायः]   :-सूतजी बोले- तदनन्तर उन दोनों वीरोंको देखकर सर्वशास्त्रवेत्ता ब्रह्माजी साम, दान, भेद आदि नीतियोंके माध्यमसे युद्धकी समाप्तिके उपायोंको सोचने लगे ॥ १ ॥ इनके वास्तविक बलका मुझे कोई ज्ञान नहीं है। नीतिके अनुसार … Read more

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