Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायःसुबाहुद्वारा भगवती दुर्गासे सदा काशीमें रहनेका वरदान माँगना तथा देवीका वरदान देना, सुदर्शनद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीका उसे अयोध्या जाकर राज्य करनेका आदेश देना, राजाओंका सुदर्शनसे अनुमति लेकर अपने-अपने राज्योंको प्रस्थान)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायःसुबाहुद्वारा भगवती दुर्गासे सदा काशीमें रहनेका वरदान माँगना तथा देवीका वरदान देना, सुदर्शनद्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीका उसे अयोध्या जाकर राज्य करनेका आदेश देना, राजाओंका सुदर्शनसे अनुमति लेकर अपने-अपने राज्योंको प्रस्थान) [अथ चतुर्विंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] उन भवानीका वचन सुनकर नृपश्रेष्ठ सुबाहुने भक्तिसे युक्त होकर यह … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःसुदर्शनका शशिकलाके साथ भारद्वाज-आश्रमके लिये प्रस्थान, युधाजित् तथा अन्य राजाओंसे सुदर्शनका घोर संग्राम, भगवती सिंहवाहिनी दुर्गाका प्राकट्य, भगवतीद्वारा युधाजित् और शत्रुजित्का वध, सुबाहुद्वारा भगवतीकी स्तुति)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःसुदर्शनका शशिकलाके साथ भारद्वाज-आश्रमके लिये प्रस्थान, युधाजित् तथा अन्य राजाओंसे सुदर्शनका घोर संग्राम, भगवती सिंहवाहिनी दुर्गाका प्राकट्य, भगवतीद्वारा युधाजित् और शत्रुजित्का वध, सुबाहुद्वारा भगवतीकी स्तुति) [अथ त्रयोविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] उस समय राजा सुबाहुने छः दिनोंतक विविध प्रकारके भोजन बनवाकर सुदर्शनको प्रेमपूर्वक खिलाया ॥ १ ॥ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:द्वाविंशोऽध्यायःशशिकलाका गुप्त स्थानमें सुदर्शनके साथ विवाह, विवाहकी बात जानकर राजाओंका सुबाहुके प्रति क्रोध प्रकट करना तथा सुदर्शनका मार्ग रोकनेका निश्चय करना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:द्वाविंशोऽध्यायःशशिकलाका गुप्त स्थानमें सुदर्शनके साथ विवाह, विवाहकी बात जानकर राजाओंका सुबाहुके प्रति क्रोध प्रकट करना तथा सुदर्शनका मार्ग रोकनेका निश्चय करना) [अथ द्वाविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- पवित्र अन्तःकरणवाले राजा सुबाहु कन्याकी बात सुनकर राजाओंके पास जाकर बोले- हे महाराजाओ ! आपलोग इस समय अपने- अपने शिविरमें जायें, मैं कन्याका … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःराजा सुबाहुका राजाओंसे अपनी कन्याकी इच्छा बताना, युधाजित्‌का क्रोधित होकर सुबाहुको फटकारना तथा अपने दौहित्रसे शशिकलाका विवाह करनेको कहना, माताद्वारा शशिकलाको पुनः समझाना, किंतु शशिकलाका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःराजा सुबाहुका राजाओंसे अपनी कन्याकी इच्छा बताना, युधाजित्‌का क्रोधित होकर सुबाहुको फटकारना तथा अपने दौहित्रसे शशिकलाका विवाह करनेको कहना, माताद्वारा शशिकलाको पुनः समझाना, किंतु शशिकलाका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना)   [अथैकविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] महाराज सुबाहु पुत्रीके द्वारा कही गयी युक्तिसंगत बातें सुनकर इस चिन्तामें पड़ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:विंशोऽध्यायःराजाओंका सुदर्शनसे स्वयंवरमें आनेका कारण पूछना और सुदर्शनका उन्हें स्वप्नमें भगवतीद्वारा दिया गया आदेश बताना, राजा सुबाहुका शशिकलाको समझाना, परंतु उसका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:विंशोऽध्यायःराजाओंका सुदर्शनसे स्वयंवरमें आनेका कारण पूछना और सुदर्शनका उन्हें स्वप्नमें भगवतीद्वारा दिया गया आदेश बताना, राजा सुबाहुका शशिकलाको समझाना, परंतु उसका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना) [अथ विंशोऽध्यायः] :’व्यासजी बोले- हे महाभाग ! तब महाराज केरल- नरेशके ऐसा कहनेपर राजा युधाजित्ने कहा- ॥ १ ॥ हे पृथ्वीपते ! आपने … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःमाताका शशिकलाको समझाना, शशिकलाका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना, सुदर्शन तथा अन्य राजाओंका स्वयंवरमें आगमन, युधाजित्द्वारा सुदर्शनको मार डालनेकी बात कहनेपर केरलनरेशका उन्हें समझाना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःमाताका शशिकलाको समझाना, शशिकलाका अपने निश्चयपर दृढ़ रहना, सुदर्शन तथा अन्य राजाओंका स्वयंवरमें आगमन, युधाजित्द्वारा सुदर्शनको मार डालनेकी बात कहनेपर केरलनरेशका उन्हें समझाना) [अथैकोनविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- पतिके ऐसा कहनेपर रानीने सुन्दर मुसकानवाली उस कन्याको अपनी गोदमें बैठाकर उसे आश्वासन दे करके यह मधुर वचन कहा-हे सुदति ! तुम … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धः अथाष्टादशोऽध्यायःराजकुमारी शशिकलाद्वारा मन-ही-मन सुदर्शनका वरण करना, काशिराजद्वारा स्वयंवरकी घोषणा, शशिकलाका सखीके माध्यमसे अपना निश्चय माताको बताना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धःअथाष्टादशोऽध्यायःराजकुमारी शशिकलाद्वारा मन-ही-मन सुदर्शनका वरण करना, काशिराजद्वारा स्वयंवरकी घोषणा, शशिकलाका सखीके माध्यमसे अपना निश्चय माताको बताना) [अथाष्टादशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- उस ब्राह्मणका वचन सुनकर सुन्दरी शशिकला प्रेमविभोर हो गयी और वह ब्राह्मण इतना कहकर शान्तभावसे उस स्थानसे चला गया ॥ १॥ उस श्रेष्ठ ब्राह्मणके चले जानेपर वह सुन्दरी पूर्व … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धः सप्तदशोऽध्यायःयुधाजित्का अपने प्रधान अमात्यसे परामर्श करना, प्रधान अमात्यका इस सन्दर्भमें वसिष्ठ-विश्वामित्र-प्रसंग सुनाना और परामर्श मानकर युधाजित्का वापस लौट जाना, बालक सुदर्शनको दैवयोगसे कामराज नामक बीजमन्त्रकी प्राप्ति, भगवतीकी आराधनासे सुदर्शनको उनका प्रत्यक्ष दर्शन होना तथा काशिराजकी कन्या शशिकलाको स्वप्नमें भगवतीद्वारा सुदर्शनका वरण करनेका आदेश देना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धःसप्तदशोऽध्यायःयुधाजित्का अपने प्रधान अमात्यसे परामर्श करना, प्रधान अमात्यका इस सन्दर्भमें वसिष्ठ-विश्वामित्र-प्रसंग सुनाना और परामर्श मानकर युधाजित्का वापस लौट जाना, बालक सुदर्शनको दैवयोगसे कामराज नामक बीजमन्त्रकी प्राप्ति, भगवतीकी आराधनासे सुदर्शनको उनका प्रत्यक्ष दर्शन होना तथा काशिराजकी कन्या शशिकलाको स्वप्नमें भगवतीद्वारा सुदर्शनका वरण करनेका आदेश देना) [अथ सप्तदशोऽध्यायः] :व्यासजी बोले- … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धः षोडशोऽध्यायःयुधाजित्का भारद्वाजमुनिके आश्रमपर आना और उनसे मनोरमाको भेजनेका आग्रह करना, प्रत्युत्तरमें मुनिका ‘शक्ति हो तो ले जाओ’ – ऐसा कहना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धःषोडशोऽध्यायःयुधाजित्का भारद्वाजमुनिके आश्रमपर आना और उनसे मनोरमाको भेजनेका आग्रह करना, प्रत्युत्तरमें मुनिका ‘शक्ति हो तो ले जाओ’ – ऐसा कहना) [अथ षोडशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले – [हे राजन् !] तदनन्तर महाबली युधाजित्ने रणभूमिसे अयोध्या पहुँचकर सुदर्शनको भी मार डालनेकी इच्छासे मनोरमाके विषयमें लोगोंसे पूछा ॥ १ ॥ ‘मनोरमा … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःराजा युधाजित् और वीरसेनका युद्ध, वीरसेनकी मृत्यु, राजा ध्रुवसन्धिकी रानी मनोरमाका अपने पुत्र सुदर्शनको लेकर भारद्वाजमुनिके आश्रममें जाना तथा वहीं निवास करना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःराजा युधाजित् और वीरसेनका युद्ध, वीरसेनकी मृत्यु, राजा ध्रुवसन्धिकी रानी मनोरमाका अपने पुत्र सुदर्शनको लेकर भारद्वाजमुनिके आश्रममें जाना तथा वहीं निवास करना) [अथ पञ्चदशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] युद्ध आरम्भ हो जानेपर क्रोध एवं लोभके वशीभूत उन दोनों राजाओंने लड़नेके लिये शस्त्र उठा लिये और तब … Read more

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