Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको मायाकी प्रबलता समझाना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको मायाकी प्रबलता समझाना) [अथ चतुर्थोऽध्यायः] :-राजा बोले- हे महाभाग ! इस आख्यानको सुनकर मैं बड़े आश्चर्यमें पड़ गया हूँ। हे महामते ! यह संसार पापका मूर्तरूप है। इसके बन्धनसे मनुष्य किस प्रकार मुक्त हो सकता है ? ॥ १ ॥ जब तीनों लोकोंका वैभव पास … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 3(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःतृतीयोऽध्यायःवसुदेव और देवकीके पूर्वजन्मकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 3(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःतृतीयोऽध्यायःवसुदेव और देवकीके पूर्वजन्मकी कथा) [अथ तृतीयोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले – [हे राजन् !] भगवान् विष्णुके विभिन्न अवतार ग्रहण करने तथा इसी प्रकार सभी देवताओंके भी अंशावतार ग्रहण करनेके बहुतसे कारण हैं ॥ १॥ अब वसुदेव, देवकी तथा रोहिणीके अवतारोंका कारण यथार्थ रूपसे सुनिये ॥ २ ॥ एक … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 2(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःद्वितीयोऽध्यायःव्यासजीका जनमेजयको कर्मकी प्रधानता समझाना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 2(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःद्वितीयोऽध्यायःव्यासजीका जनमेजयको कर्मकी प्रधानता समझाना) [अथ द्वितीयोऽध्यायः] :-सूतजी बोले- हे मुनियो! ऐसा पूछे जानेपर पुराणवेत्ता, वाणीविशारद सत्यवती-पुत्र महर्षि व्यासने शान्त स्वभाववाले परीक्षित्-पुत्र जनमेजयसे उनके सन्देहोंको दूर करनेवाले वचन कहे – ॥ १३ ॥ व्यासजी बोले- हे राजन् ! इस विषयमें क्या कहा जाय। कर्मोंकी बड़ी गहन गति … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 1(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धः अथ प्रथमोऽध्यायःवसुदेव, देवकी आदिके कष्टोंके कारणके सम्बन्धमें जनमेजयका प्रश्न)

॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 1(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धः अथ प्रथमोऽध्यायःवसुदेव, देवकी आदिके कष्टोंके कारणके सम्बन्धमें जनमेजयका प्रश्न) [अथ प्रथमोऽध्यायः] :-जनमेजय बोले- हे वासवेय! हे मुनिवर ! हे सर्वज्ञाननिधे ! हे अनघ ! हमारे कुलकी वृद्धि करनेवाले हे स्वामिन् ! मैं [श्रीकृष्णके विषयमें] … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 30(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:त्रिंशोऽध्यायःश्रीराम और लक्ष्मणके पास नारदजीका आना और उन्हें नवरात्रव्रत करनेका परामर्श देना, श्रीरामके पूछनेपर नारदजीका उनसे देवीकी महिमा और नवरात्रव्रतकी विधि बतलाना, श्रीरामद्वारा देवीका पूजन और देवीद्वारा उन्हें विजयका वरदान देना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 30(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:त्रिंशोऽध्यायःश्रीराम और लक्ष्मणके पास नारदजीका आना और उन्हें नवरात्रव्रत करनेका परामर्श देना, श्रीरामके पूछनेपर नारदजीका उनसे देवीकी महिमा और नवरात्रव्रतकी विधि बतलाना, श्रीरामद्वारा देवीका पूजन और देवीद्वारा उन्हें विजयका वरदान देना)   [अथ त्रिंशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- इस प्रकार राम और लक्ष्मण परस्परमें परामर्श करके ज्यों ही चुप … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 29(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः सीताहरण, रामका शोक और लक्ष्मणद्वारा उन्हें सान्त्वना देना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 29(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः सीताहरण, रामका शोक और लक्ष्मणद्वारा उन्हें सान्त्वना देना)   [अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले – रावणका कुविचारपूर्ण वचन सुनकर सीता भयसे व्याकुल होकर काँप उठीं। पुनः मनको स्थिर करके उन्होंने कहा- हे पुलस्त्यके वंशज ! कामके वशीभूत होकर तुम ऐसा अनर्गल वचन क्यों कह रहे हो? मैं स्वैरिणी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 28(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथाष्टाविंशोऽध्यायःश्रीरामचरित्रवर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 28(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:अथाष्टाविंशोऽध्यायःश्रीरामचरित्रवर्णन)   [अथाष्टाविंशोऽध्यायः]   :-जनमेजय बोले – श्रीरामने भगवती जगदम्बाके इस सुखप्रदायक व्रतका अनुष्ठान किस प्रकार किया, वे राज्यच्युत कैसे हुए और फिर सीता हरण किस प्रकार हुआ ? ॥ १ ॥ व्यासजी बोले – पूर्वकालमें श्रीमान् महाराज दशरथ अयोध्यापुरीमें राज्य करते थे। वे सूर्यवंशमें श्रेष्ठ राजाके रूपमें … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 27(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:सप्तविंशोऽध्यायःकुमारीपूजामें निषिद्ध कन्याओंका वर्णन, नवरात्रव्रतके माहात्म्यके प्रसंगमें सुशील नामक वणिक्की कथा)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 27(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:सप्तविंशोऽध्यायःकुमारीपूजामें निषिद्ध कन्याओंका वर्णन, नवरात्रव्रतके माहात्म्यके प्रसंगमें सुशील नामक वणिक्की कथा)   [अथ सप्तविंशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] जो कन्या किसी अंगसे हीन हो, कोढ़ तथा घावयुक्त हो, जिसके शरीरके किसी अंगसे दुर्गन्ध आती हो और जो विशाल कुलमें उत्पन्न हुई हो-ऐसी कन्याका पूजामें परित्याग कर … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 26(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:षड्विंशोऽध्यायःनवरात्रव्रत-विधान, कुमारीपूजामें प्रशस्त कन्याओंका वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 26(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:षड्विंशोऽध्यायःनवरात्रव्रत-विधान, कुमारीपूजामें प्रशस्त कन्याओंका वर्णन) [अथ षड्विंशोऽध्यायः] :-जनमेजय बोले- हे द्विजश्रेष्ठ ! नवरात्रके आनेपर और विशेष करके शारदीय नवरात्रमें क्या करना चाहिये ? उसका विधान आप मुझे भलीभाँति बताइये ॥ १ ॥ हे महामते ! उस पूजनका क्या फल है और उसमें किस विधिका पालन करना चाहिये। हे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:पञ्चविंशोऽध्यायःसुदर्शनका शत्रुजित्की माताको सान्त्वना देना, सुदर्शनद्वारा अयोध्यामें तथा राजा सुबाहुद्वारा काशीमें देवी दुर्गाकी स्थापना)

Devi bhagwat puran skandh 3 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण तृतीयःस्कन्ध:पञ्चविंशोऽध्यायःसुदर्शनका शत्रुजित्की माताको सान्त्वना देना, सुदर्शनद्वारा अयोध्यामें तथा राजा सुबाहुद्वारा काशीमें देवी दुर्गाकी स्थापना)   [अथ पञ्चविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले – अयोध्या पहुँचकर नृपश्रेष्ठ सुदर्शन अपने मित्रोंके साथ राजभवनमें गये। वहाँपर शत्रुजित्की परम शोकाकुल माताको प्रणामकर उन्होंने कहा- हे माता ! मैं आपके चरणोंकी शपथ खाकर कहता हूँ कि … Read more

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