Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको मायाकी प्रबलता समझाना)
Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको मायाकी प्रबलता समझाना) [अथ चतुर्थोऽध्यायः] :-राजा बोले- हे महाभाग ! इस आख्यानको सुनकर मैं बड़े आश्चर्यमें पड़ गया हूँ। हे महामते ! यह संसार पापका मूर्तरूप है। इसके बन्धनसे मनुष्य किस प्रकार मुक्त हो सकता है ? ॥ १ ॥ जब तीनों लोकोंका वैभव पास … Read more