Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायःश्रीकृष्णावतारकी संक्षिप्त कथा, कृष्णपुत्रका प्रसूतिगृहसे हरण, कृष्णद्वारा भगवतीकी स्तुति, भगवती चण्डिकाद्वारा सोलह वर्षके बाद पुनः पुत्रप्राप्तिका वर देना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायःश्रीकृष्णावतारकी संक्षिप्त कथा, कृष्णपुत्रका प्रसूतिगृहसे हरण, कृष्णद्वारा भगवतीकी स्तुति, भगवती चण्डिकाद्वारा सोलह वर्षके बाद पुनः पुत्रप्राप्तिका वर देना) [अथ चतुर्विंशोऽध्यायः] व्यासजी बोले – [हे राजन् !] प्रातः काल नन्दजीके घरमें पुत्रजन्मका बड़ा भारी समारोह सम्पन्न हुआ, यह बात चारों ओर फैल गयी और कंसने भी किसी दूतके … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःकंसके कारागारमें भगवान् श्रीकृष्णका अवतार, वसुदेवजीका उन्हें गोकुल पहुँचाना और वहाँसे योगमायास्वरूपा कन्याको लेकर आना, कंसद्वारा कन्याके वधका प्रयास, योगमायाद्वारा आकाशवाणी करनेपर कंसका अपने सेवकोंद्वारा नवजात शिशुओंका वध कराना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःकंसके कारागारमें भगवान् श्रीकृष्णका अवतार, वसुदेवजीका उन्हें गोकुल पहुँचाना और वहाँसे योगमायास्वरूपा कन्याको लेकर आना, कंसद्वारा कन्याके वधका प्रयास, योगमायाद्वारा आकाशवाणी करनेपर कंसका अपने सेवकोंद्वारा नवजात शिशुओंका वध कराना) [अथ त्रयोविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [ हे राजन्!] उग्रसेनपुत्र कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंका वध कर दिये जानेपर तथा … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:द्वाविंशोऽध्यायःदेवकीके छः पुत्रोंके पूर्वजन्मकी कथा, सातवें पुत्रके रूपमें भगवान् संकर्षणका अवतार, देवताओं तथा दानवोंके अंशावतारोंका वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:द्वाविंशोऽध्यायःदेवकीके छः पुत्रोंके पूर्वजन्मकी कथा, सातवें पुत्रके रूपमें भगवान् संकर्षणका अवतार, देवताओं तथा दानवोंके अंशावतारोंका वर्णन)   [अथ द्वाविंशोऽध्यायः] :-जनमेजय बोले- हे पितामह ! उस बालकने ऐसा कौन-सा पापकर्म किया था, जिससे जन्म लेते ही उसको दुष्टात्मा कंसने मार डाला ? ॥ १॥ महान् ज्ञानी, धर्मपरायण तथा … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःदेवकीके प्रथम पुत्रका जन्म, वसुदेवद्वारा प्रतिज्ञानुसार उसे कंसको अर्पित करना और कंसद्वारा उस नवजात शिशुका वध)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःदेवकीके प्रथम पुत्रका जन्म, वसुदेवद्वारा प्रतिज्ञानुसार उसे कंसको अर्पित करना और कंसद्वारा उस नवजात शिशुका वध) [अथैकविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! इसके बाद समय आनेपर देवस्वरूपिणी देवकीने वसुदेवके संयोगसे विधिवत् गर्भ धारण किया ॥ १ ॥ दसवाँ माह पूर्ण होनेपर जब देवकीने अत्यन्त रूपसम्पन्न तथा सुडौल … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:विंशोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको भगवतीकी महिमा सुनाना तथा कृष्णावतारकी कथाका उपक्रम)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:विंशोऽध्यायःव्यासजीद्वारा जनमेजयको भगवतीकी महिमा सुनाना तथा कृष्णावतारकी कथाका उपक्रम) [अथ विंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे भारत ! सुनिये, अब मैं आपको पृथ्वीका भार उतारने और कुरुक्षेत्र तथा प्रभासक्षेत्रमें योगमायाके द्वारा सेनाके संहारका वृत्तान्त बताऊँगा ॥ १ ॥ भृगुके शापके प्रताप तथा महामायाकी शक्तिसे ही अमित तेजस्वी भगवान् विष्णुका … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीका स्तवन, भगवतीद्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुनको निमित्त बनाकर अपनी शक्तिसे पृथ्वीका भार दूर करनेका आश्वासन देना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीका स्तवन, भगवतीद्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुनको निमित्त बनाकर अपनी शक्तिसे पृथ्वीका भार दूर करनेका आश्वासन देना) [अथैकोनविंशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] ऐसा कहनेके उपरान्त भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीसे फिर कहा- जिन भगवतीकी मायासे मोहित रहनेके कारण सभी लोग परमतत्त्वको नहीं जान पाते, उन्हींकी मायासे आच्छादित … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध: अथाष्टादशोऽध्यायःपापभारसे व्यथित पृथ्वीका देवलोक जाना, इन्द्रका देवताओं और पृथ्वीके साथ ब्रह्मलोक जाना, ब्रह्माजीका पृथ्वी तथा इन्द्रादि देवताओंसहित विष्णुलोक जाकर विष्णुकी स्तुति करना, विष्णुद्वारा अपनेको भगवतीके अधीन बताना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध: अथाष्टादशोऽध्यायःपापभारसे व्यथित पृथ्वीका देवलोक जाना, इन्द्रका देवताओं और पृथ्वीके साथ ब्रह्मलोक जाना, ब्रह्माजीका पृथ्वी तथा इन्द्रादि देवताओंसहित विष्णुलोक जाकर विष्णुकी स्तुति करना, विष्णुद्वारा अपनेको भगवतीके अधीन बताना) [अथाष्टादशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! सुनिये, अब मैं श्रीकृष्णके महान् चरित्र, उनके अवतारके कारण और भगवतीके अद्भुत … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःसप्तदशोऽध्यायःश्रीनारायणद्वारा अप्सराओंको वरदान देना, राजा जनमेजयद्वारा व्यासजीसे श्रीकृष्णावतारका चरित सुनानेका निवेदन करना)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःसप्तदशोऽध्यायःश्रीनारायणद्वारा अप्सराओंको वरदान देना, राजा जनमेजयद्वारा व्यासजीसे श्रीकृष्णावतारका चरित सुनानेका निवेदन करना) [अथ सप्तदशोऽध्यायः] :-जनमेजय बोले – हे मुने ! आप नर-नारायणके आश्रममें आयी हुई अप्सराओंकी चर्चा पहले ही कर चुके हैं, जो काम-पीड़ित होकर शान्तचित्त मुनि नारायणपर आसक्त हो गयी थीं। उसके बाद मुनि नारायण उन्हें … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःषोडशोऽध्यायःभगवान् श्रीहरिके विविध अवतारोंका संक्षिप्त वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःषोडशोऽध्यायःभगवान् श्रीहरिके विविध अवतारोंका संक्षिप्त वर्णन) [अथ षोडशोऽध्यायः] जनमेजय बोले- हे मुनिश्रेष्ठ ! हे विभो !अद्भुत चरित्रवाले भगवान् विष्णुने भृगुके शापसे किस मन्वन्तरमें किस प्रकार अवतार ग्रहण किये। हे धर्मज्ञ ! हे ब्रह्मन् ! श्रवण करनेपर समस्त सुख सुलभ करानेवाली तथा पापोंका नाश कर देनेवाली भगवान् विष्णुकी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःदेवता और दैत्योंके युद्धमें दैत्योंकी विजय, इन्द्रद्वारा भगवतीकी स्तुति, भगवतीका प्रकट होकर दैत्योंके पास जाना, प्रह्लादद्वारा भगवतीकी स्तुति, देवीके आदेशसे दैत्योंका पातालगमन)

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःदेवता और दैत्योंके युद्धमें दैत्योंकी विजय, इन्द्रद्वारा भगवतीकी स्तुति, भगवतीका प्रकट होकर दैत्योंके पास जाना, प्रह्लादद्वारा भगवतीकी स्तुति, देवीके आदेशसे दैत्योंका पातालगमन)   [अथ पञ्चदशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- उन महात्मा शुक्राचार्यका यह वचन सुनकर राजकुमार प्रह्लाद अत्यन्त हर्षित हुए। प्रारब्धको बलवान् मानकर प्रह्लादने उन दैत्योंसे कहा-युद्ध करनेपर … Read more

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