Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 9(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःनवमोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीको आयुध और आभूषण समर्पित करना तथा उनकी स्तुति करना, देवीका प्रचण्ड अट्टहास करना, जिसे सुनकर महिषासुरका उद्विग्न होकर अपने प्रधान अमात्यको देवीके पास भेजना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 9(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःनवमोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीको आयुध और आभूषण समर्पित करना तथा उनकी स्तुति करना, देवीका प्रचण्ड अट्टहास करना, जिसे सुनकर महिषासुरका उद्विग्न होकर अपने प्रधान अमात्यको देवीके पास भेजना) [अथ नवमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] तब भगवान् विष्णुका यह वचन सुनकर सभी देवता बहुत प्रसन्न हुए। वे तुरंत महालक्ष्मीको … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 8(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथाष्टमोऽध्यायःब्रह्माप्रभृति समस्त देवताओंके शरीरसे तेजःपुंजका निकलना और उस तेजोराशिसे भगवतीका प्राकट्य)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 8(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथाष्टमोऽध्यायःब्रह्माप्रभृति समस्त देवताओंके शरीरसे तेजःपुंजका निकलना और उस तेजोराशिसे भगवतीका प्राकट्य) [अथाष्टमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! उन देवताओंने शीघ्रतापूर्वक भगवान् विष्णुके प्रिय धाम वैकुण्ठमें पहुँचकर वहाँ उन श्रीहरिका विशाल सदन देखा, जो सम्पूर्ण शोभाओंसे युक्त तथा दिव्य महलोंसे सुशोभित था। सुन्दर तथा सुखदायक वह भवन सरोवर, … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 7(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःसप्तमोऽध्यायःमहिषासुरको अवध्य जानकर त्रिदेवोंका अपने-अपने लोक लौट जाना, देवताओंकी पराजय तथा महिषासुरका स्वर्गपर आधिपत्य, इन्द्रका ब्रह्मा और शिवजीके साथ विष्णुलोकके लिये प्रस्थान)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 7(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःसप्तमोऽध्यायःमहिषासुरको अवध्य जानकर त्रिदेवोंका अपने-अपने लोक लौट जाना, देवताओंकी पराजय तथा महिषासुरका स्वर्गपर आधिपत्य, इन्द्रका ब्रह्मा और शिवजीके साथ विष्णुलोकके लिये प्रस्थान) [अथ सप्तमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे महाराज जनमेजय !] महिषासुरने समस्त दानवोंको खिन्नमनस्क देखकर महिषका वह रूप छोड़कर तत्काल सिंहका रूप धारण कर लिया ॥ १ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 6(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःषष्ठोऽध्यायःभगवान् विष्णु और शिवके साथ महिषासुरका भयानक युद्ध) [अथ षष्ठोऽध्यायः]

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 6(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःषष्ठोऽध्यायःभगवान् विष्णु और शिवके साथ महिषासुरका भयानक युद्ध) [अथ षष्ठोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- इस प्रकार दानव ताम्रके मूच्छित हो जानेपर महिषासुर कुपित हो गया और एक विशाल गदा लेकर देवताओंके समक्ष जा डटा ॥ १ ॥ हे देवताओ ! तुम सब ठहरो; मैं अभी अपनी गदासे तुम सभीको … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 5(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चमोऽध्यायःइन्द्रका ब्रह्मा, शिव और विष्णुके पास जाना, तीनों देवताओंसहित इन्द्रका युद्धस्थलमें आना तथा चिक्षुर, बिडाल और ताम्रको पराजित करना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 5(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चमोऽध्यायःइन्द्रका ब्रह्मा, शिव और विष्णुके पास जाना, तीनों देवताओंसहित इन्द्रका युद्धस्थलमें आना तथा चिक्षुर, बिडाल और ताम्रको पराजित करना) [अथ पञ्चमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे महाराज ! यह सुनकर सहस्त्रनेत्र इन्द्रने बृहस्पतिसे कहा कि मैं महिषासुरके विनाशके लिये अब युद्धकी तैयारी अवश्य करूँगा; क्योंकि उद्योगके बिना न राज्य, … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःइन्द्रका देवताओं तथा गुरु बृहस्पतिसे परामर्श करना तथा बृहस्पतिद्वारा जय-पराजयमें दैवकी प्रधानता बतलाना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 4(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्थोऽध्यायःइन्द्रका देवताओं तथा गुरु बृहस्पतिसे परामर्श करना तथा बृहस्पतिद्वारा जय-पराजयमें दैवकी प्रधानता बतलाना) [अथ चतुर्थोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! दूतके चले जानेपर इन्द्रने भी यम, वायु, कुबेर तथा वरुण- इन देवताओंको बुलाकर यह बात कही ॥ १ ॥ रम्भका पुत्र महाबली दैत्यराज महिषासुर इस समय वरदानके … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 3(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःतृतीयोऽध्यायःमहिषासुरका दूत भेजकर इन्द्रको स्वर्ग खाली करनेका आदेश देना, दूतद्वारा इन्द्रका युद्धहेतु आमन्त्रण प्राप्तकर महिषासुरका दानववीरोंको युद्धके लिये सुसज्जित होनेका आदेश देना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 3(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःतृतीयोऽध्यायःमहिषासुरका दूत भेजकर इन्द्रको स्वर्ग खाली करनेका आदेश देना, दूतद्वारा इन्द्रका युद्धहेतु आमन्त्रण प्राप्तकर महिषासुरका दानववीरोंको युद्धके लिये सुसज्जित होनेका आदेश देना) [अथ तृतीयोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- इस प्रकार वरदान पानेके कारण अभिमानयुक्त उस महाबली दानव महिषासुरने राज्य प्राप्त करके सम्पूर्ण जगत्को अपने अधीन कर लिया ॥ १ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 2(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धः द्वितीयोऽध्यायःमहिषासुरके जन्म, तप और वरदान प्राप्तिकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 2(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धः द्वितीयोऽध्यायःमहिषासुरके जन्म, तप और वरदान प्राप्तिकी कथा) [अथ द्वितीयोऽध्यायः]   :-राजा बोले- हे स्वामिन् ! आपने भगवती योगेश्वरीका यह प्रभाव विस्तारपूर्वक कहा। अब आप उन महामायाका चरित्र कहिये, उसे सुननेकी मेरी बड़ी उत्सुकता है। जो मनुष्य इस बातको भलीभाँति जानता है कि यह स्थावर जंगमात्मक संसार … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 1(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धः प्रथमोऽध्यायः व्यासजीद्वारा त्रिदेवोंकी तुलनामें भगवतीकी उत्तमताका वर्णन)

॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 1(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धः प्रथमोऽध्यायः व्यासजीद्वारा त्रिदेवोंकी तुलनामें भगवतीकी उत्तमताका वर्णन) [अथ प्रथमोऽध्यायः]   :-ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! आपने यह बहुत ही उत्तम कथा कही, जिसमें भगवान् श्रीकृष्णके सर्वपापविनाशक तथा अलौकिक चरित्रका वर्णन है ॥ १ ॥ … Read more

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:पञ्चविंशोऽध्यायःव्यासजीद्वारा शाम्भवी मायाकी बलवत्ताका वर्णन, श्रीकृष्णद्वारा शिवजीकी प्रसन्नताके लिये तप करना और शिवजीद्वारा उन्हें वरदान देना) [अथ पञ्चविंशोऽध्यायः]

Devi bhagwat puran skandh 4 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण चतुर्थः स्कन्ध:पञ्चविंशोऽध्यायःव्यासजीद्वारा शाम्भवी मायाकी बलवत्ताका वर्णन, श्रीकृष्णद्वारा शिवजीकी प्रसन्नताके लिये तप करना और शिवजीद्वारा उन्हें वरदान देना) [अथ पञ्चविंशोऽध्यायः] :-राजा बोले- हे मुनिवर ! आपकी इस बातसे तथा साक्षात् विष्णुके अंशावतार भगवान् कृष्णके ऊपर कष्टका पड़ना देखकर मुझे सन्देह हो रहा है ॥ १ ॥ भगवान् विष्णुके अंशसे … Read more

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