Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकोनविंशोऽध्यायः देवताओंद्वारा भगवतीकी स्तुति)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 19(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकोनविंशोऽध्यायः देवताओंद्वारा भगवतीकी स्तुति) [अथैकोनविंशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले – महिषासुरका संहार देखकर इन्द्र आदि प्रधान देवता परम प्रसन्न हुए और वे जगदम्बाकी स्तुति करने लगे ॥ १ ॥ देवता बोले- हे देवि ! आपकी ही शक्तिसे ब्रह्मा इस जगत्का सृजन करते हैं, भगवान् विष्णु पालन करते हैं … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथाष्टादशोऽध्यायःदुर्धर, त्रिनेत्र, अन्धक और महिषासुरका वध)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 18(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथाष्टादशोऽध्यायःदुर्धर, त्रिनेत्र, अन्धक और महिषासुरका वध) [अथाष्टादशोऽध्यायः] : -महिष बोला- उस मन्दोदरीकी इन्दुमती नामकी एक छोटी बहन थी, जो समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न तथा अत्यन्त रूपवती थी। जब वह विवाहके योग्य हुई, तब उसके विवाहकी तैयारी होने लगी। उसका स्वयंवर रचाया गया, स्वयंवरके मण्डपमें अनेक देशोंके राजा … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःसप्तदशोऽध्यायःमहिषासुरका देवीको मन्दोदरी नामक राजकुमारीका आख्यान सुनाना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 17(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःसप्तदशोऽध्यायःमहिषासुरका देवीको मन्दोदरी नामक राजकुमारीका आख्यान सुनाना) [अथ सप्तदशोऽध्यायः] : -व्यासजी बोले- [हे महाराज!] उसका यह वचन सुनकर भगवतीने उस दानवसे पूछा- वह स्त्री मन्दोदरी कौन थी और वह राजा कौन था, जिसे उसने त्याग दिया था ? ॥ १॥ बादमें उसने जिसे पति बनाया, वह धूर्त … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःषोडशोऽध्यायःमहिषासुरका रणभूमिमें आना तथा देवीसे प्रणय-याचना करना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 16(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःषोडशोऽध्यायःमहिषासुरका रणभूमिमें आना तथा देवीसे प्रणय-याचना करना) [अथ षोडशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- उन सैनिकोंकी बात सुनकर राजा महिष क्रोधित हो उठा और उसने सारथिसे कहा-हजार गधोंसे जुते हुए, ध्वजा तथा पताकाओंसे सुशोभित, अनेक प्रकारके आयुधोंसे परिपूर्ण, सुन्दर चक्कों तथा जुएसे विभूषित तथा प्रकाशमान मेरा अद्भुत रथ तुरंत ले … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःबिडालाख्य और असिलोमाका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 15(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चदशोऽध्यायःबिडालाख्य और असिलोमाका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध) [अथ पञ्चदशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- उस देवीने चिक्षुराख्य तथा ताम्रका वध कर दिया- यह सुनकर महिषासुरको बड़ा विस्मय हुआ। अब उसने विशाल सेनासे युक्त, शस्त्रास्त्र लिये हुए तथा कवच धारण किये हुए असिलोमा, बिडालाख्य … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 14(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्दशोऽध्यायःचिक्षुर और ताम्रका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 14(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्दशोऽध्यायःचिक्षुर और ताम्रका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध) [अथ चतुर्दशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! दुर्मुख मार दिया गया- यह सुनकर महिषासुर क्रोधसे मूच्छित हो गया और दानवोंसे बार-बार कहने लगा- ‘यह क्या हो गया ?’ दुर्मुख और बाष्कल तो बड़े … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 13(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःत्रयोदशोऽध्यायःबाष्कल और दुर्मुखका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 13(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःत्रयोदशोऽध्यायःबाष्कल और दुर्मुखका रणभूमिमें आना, देवीसे उनका वार्तालाप और युद्ध तथा देवीद्वारा उनका वध) [अथ त्रयोदशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! ऐसा कहकर अभिमानसे चूर अंगोंवाले तथा सभी शस्त्रास्त्रोंके विशारद वे दोनों महाबाहु दैत्य बाष्कल तथा दुर्मुख समरांगणकी ओर चल पड़े ॥ १ ॥ इसके बाद वे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 12(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःद्वादशोऽध्यायःदेवीके अट्टहाससे भयभीत होकर ताम्रका महिषासुरके पास भाग आना, महिषासुरका अपने मन्त्रियोंके साथ पुनः विचार-विमर्श तथा दुर्धर, दुर्मुख और बाष्कलकी गर्वोक्ति)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 12(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःद्वादशोऽध्यायःदेवीके अट्टहाससे भयभीत होकर ताम्रका महिषासुरके पास भाग आना, महिषासुरका अपने मन्त्रियोंके साथ पुनः विचार-विमर्श तथा दुर्धर, दुर्मुख और बाष्कलकी गर्वोक्ति) [अथ द्वादशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- उस ताम्रकी वह बात सुनकर भगवती जगदम्बिका मेघके समान गम्भीर वाणीमें उससे हँसते हुए कहने लगीं ॥ १ ॥ देवी बोलीं- हे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 11(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकादशोऽध्यायः महिषासुरका अपने मन्त्रियोंसे विचार-विमर्श करना और ताम्रको भगवतीके पास भेजना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 11(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकादशोऽध्यायः महिषासुरका अपने मन्त्रियोंसे विचार-विमर्श करना और ताम्रको भगवतीके पास भेजना) [अथैकादशोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले – मन्त्रीकी यह बात सुनकर मदोन्मत्त राजा महिषासुर अपने वयोवृद्ध मन्त्रियोंको बुलाकर उनसे यह वचन कहने लगा ॥ १॥ राजा बोला- हे मन्त्रिगण! आपलोग निर्भीकता-पूर्वक मुझे शीघ्र बतायें कि इस समय मुझे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 10(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःदशमोऽध्यायःदेवीद्वारा महिषासुरके अमात्यको अपना उद्देश्य बताना तथा अमात्यका वापस लौटकर देवीद्वारा कही गयी बातें महिषासुरको बताना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 10(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःदशमोऽध्यायःदेवीद्वारा महिषासुरके अमात्यको अपना उद्देश्य बताना तथा अमात्यका वापस लौटकर देवीद्वारा कही गयी बातें महिषासुरको बताना)   [अथ दशमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे महाराज ! उसकी यह बात सुनकर नारीश्रेष्ठ भगवती जोरसे हँसकर मेघके समान गम्भीर वाणीमें उससे कहने लगीं ॥ १ ॥ देवी बोलीं- हे मन्त्रिवर ! … Read more

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