Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 29(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःरक्तबीजका वध और निशुम्भका युद्धक्षेत्रके लिये प्रस्थान)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 29(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःरक्तबीजका वध और निशुम्भका युद्धक्षेत्रके लिये प्रस्थान) [अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! किसी समय शंकरजीने उस दानव रक्तबीजको यह बड़ा ही अद्भुत वर दे डाला था, मैं उसे बता रहा हूँ; आप सुनिये ॥ १ ॥ उस दानवके शरीरसे जब रक्तकी बूँद पृथ्वीपर गिरती थी, तब … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 28(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:अथाष्टाविंशोऽध्यायःदेवीके साथ रक्तबीजका युद्ध, विभिन्न शक्तियोंके साथ भगवान् शिवका रणस्थलमें आना तथा भगवतीका उन्हें दूत बनाकर शुम्भके पास भेजना, भगवान् शिवके सन्देशसे दानवोंका क्रुद्ध होकर युद्धके लिये आना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 28(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:अथाष्टाविंशोऽध्यायःदेवीके साथ रक्तबीजका युद्ध, विभिन्न शक्तियोंके साथ भगवान् शिवका रणस्थलमें आना तथा भगवतीका उन्हें दूत बनाकर शुम्भके पास भेजना, भगवान् शिवके सन्देशसे दानवोंका क्रुद्ध होकर युद्धके लिये आना) [अथाष्टाविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! तत्पश्चात् वे देवी हँसकर मेघके समान गम्भीर वाणीमें उस रक्तबीजसे यह युक्तिसंगत वचन … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 27(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:सप्तविंशोऽध्यायःशुम्भका रक्तबीजको भगवती अम्बिकाके पास भेजना और उसका देवीसे वार्तालाप)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 27(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:सप्तविंशोऽध्यायःशुम्भका रक्तबीजको भगवती अम्बिकाके पास भेजना और उसका देवीसे वार्तालाप) [अथ सप्तविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] उन दोनों दैत्योंको मारा गया देखकर मरनेसे बचे सभी सैनिक भागकर राजा शुम्भके पास गये। कुछ सैनिकोंके अंग बाणोंसे छिद गये थे, कुछके हाथ कट गये थे, उनके पूरे शरीरसे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 26(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:षड्विंशोऽध्यायःभगवती अम्बिकासे चण्ड-मुण्डका संवाद और युद्ध, देवी कालिकाद्वारा चण्ड-मुण्डका वध)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 26(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्ध:षड्विंशोऽध्यायःभगवती अम्बिकासे चण्ड-मुण्डका संवाद और युद्ध, देवी कालिकाद्वारा चण्ड-मुण्डका वध) (अथ षड्विंशोऽध्यायः) :-व्यासजी बोले- [हे महाराज !] तदनन्तर शुम्भसे ऐसा आदेश पाकर महाबली चण्ड-मुण्ड विशाल सेनाके साथ बड़े वेगसे रणभूमिकी ओर चल पड़े ॥ १ ॥ तब देवताओंका हित करनेवाली देवीको वहाँ युद्धभूमिमें विद्यमान देखकर वे दोनों … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चविंशोऽध्यायःभगवती काली और धूम्रलोचनका संवाद, कालीके हुंकारसे धूम्रलोचनका भस्म होना तथा शुम्भका चण्ड-मुण्डको युद्धहेतु प्रस्थानका आदेश देना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 25(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःपञ्चविंशोऽध्यायःभगवती काली और धूम्रलोचनका संवाद, कालीके हुंकारसे धूम्रलोचनका भस्म होना तथा शुम्भका चण्ड-मुण्डको युद्धहेतु प्रस्थानका आदेश देना) [अथ पञ्चविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे महाराज!] यह बात कहकर धूम्रलोचन चुप हो गया। तब भगवती काली हँसकर सुन्दर वचन बोलीं- धूर्त ! तुम तो पूरे विदूषक हो और नटों-जैसी बात … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्विंशोऽध्यायःशुम्भका धूम्रलोचनको देवीके पास भेजना और धूम्रलोचनका देवीको समझानेका प्रयास करना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 24(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःचतुर्विंशोऽध्यायःशुम्भका धूम्रलोचनको देवीके पास भेजना और धूम्रलोचनका देवीको समझानेका प्रयास करना) [अथ चतुर्विंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले – भगवतीका वह वचन सुनकर वह दूत विस्मित हो गया और उसने देवीसे कहा- हे सुन्दर कटाक्षवाली ! तुम स्त्रीस्वभावके कारण साहसपूर्वक यह क्या बोल रही हो ? ॥ १॥   हे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःत्रयोविंशोऽध्यायःभगवतीके श्रीविग्रहसे कौशिकीका प्राकट्य, देवीकी कालिकारूपमें परिणति, चण्ड-मुण्डसे देवीके अद्भुत सौन्दर्यको सुनकर शुम्भका सुग्रीवको दूत बनाकर भेजना, जगदम्बाका विवाहके विषयमें अपनी शर्त बताना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 23(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःत्रयोविंशोऽध्यायःभगवतीके श्रीविग्रहसे कौशिकीका प्राकट्य, देवीकी कालिकारूपमें परिणति, चण्ड-मुण्डसे देवीके अद्भुत सौन्दर्यको सुनकर शुम्भका सुग्रीवको दूत बनाकर भेजना, जगदम्बाका विवाहके विषयमें अपनी शर्त बताना) [अथ त्रयोविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- [हे राजन् !] तब शत्रुओंसे सन्त्रस्त देवताओंके इस प्रकार स्तुति करनेपर भगवतीने अपने शरीरसे एक दूसरा रूप प्रकट कर दिया … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःद्वाविंशोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीकी स्तुति और उनका प्राकट्य)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 22(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःद्वाविंशोऽध्यायःदेवताओंद्वारा भगवतीकी स्तुति और उनका प्राकट्य) [अथ द्वाविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे नृपश्रेष्ठ ! सभी देवता पराजित हो गये। इसके बाद शुम्भ राज्यपर शासन करने लगा। इस प्रकार एक हजार वर्ष व्यतीत हो गये ॥ १ ॥ तत्पश्चात् राज्यच्युत होनेके कारण देवता महान् दुस्सह चिन्तामें पड़ गये। दुःखसे … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकविंशोऽध्यायःशुम्भ और निशुम्भको ब्रह्माजीके द्वारा वरदान, देवताओंके साथ उनका युद्ध और देवताओंकी पराजय)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 21(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःअथैकविंशोऽध्यायःशुम्भ और निशुम्भको ब्रह्माजीके द्वारा वरदान, देवताओंके साथ उनका युद्ध और देवताओंकी पराजय) [अथैकविंशोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! सुनिये, मैं देवीका उत्तम चरित्र कहता हूँ; यह सम्पूर्ण प्राणियोंको सुख देनेवाला तथा समस्त पापोंका नाश करनेवाला है ॥ १ ॥   [पूर्वकालमें] शुम्भ और निशुम्भ नामक दो … Read more

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःविंशोऽध्यायःदेवीका मणिद्वीप पधारना तथा राजा शत्रुघ्नका भूमण्डलाधिपति बनना)

Devi bhagwat puran skandh 5 chapter 20(श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण पञ्चमः स्कन्धःविंशोऽध्यायःदेवीका मणिद्वीप पधारना तथा राजा शत्रुघ्नका भूमण्डलाधिपति बनना) [अथ विंशोऽध्यायः] :-जनमेजय बोले- हे मुने ! अब मैंने भगवतीके अत्यन्त अद्भुत तथा जगत्को शान्ति प्रदान करनेवाले प्रभावको तो देख लिया, फिर भी हे द्विजवर ! आपके मुखारविन्दसे निकली हुई सुधामयी कथाको बार-बार सुनते हुए भी मुझे तृप्ति नहीं … Read more

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