Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 14 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:चतुर्दशोऽध्यायःराजा निमि और वसिष्ठका एक-दूसरेको शाप देना, वसिष्ठका मित्रावरुणके पुत्रके रूपमें जन्म लेना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 14 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:चतुर्दशोऽध्यायःराजा निमि और वसिष्ठका एक-दूसरेको शाप देना, वसिष्ठका मित्रावरुणके पुत्रके रूपमें जन्म लेना)   [अथ चतुर्दशोऽध्यायः]   :-जनमेजय बोले- हे महाभाग ! ब्रह्माके पुत्र मुनि वसिष्ठका ‘मैत्रावरुणि’ – यह नाम कैसे पड़ा ? हे वक्ताओंमें श्रेष्ठ ! किस कर्म अथवा गुणके कारण उन्होंने यह नाम प्राप्त … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 13 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:त्रयोदशोऽध्यायःराजा हरिश्चन्द्रका शुनःशेपको यज्ञीय पशु बनाकर यज्ञ करना, विश्वामित्रसे प्राप्त वरुणमन्त्रके जपसे शुनःशेपका मुक्त होना, परस्पर शापसे विश्वामित्र और वसिष्ठका बक तथा आडी होना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 13 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:त्रयोदशोऽध्यायःराजा हरिश्चन्द्रका शुनःशेपको यज्ञीय पशु बनाकर यज्ञ करना, विश्वामित्रसे प्राप्त वरुणमन्त्रके जपसे शुनःशेपका मुक्त होना, परस्पर शापसे विश्वामित्र और वसिष्ठका बक तथा आडी होना) (अथ त्रयोदशोऽध्यायः) :-इन्द्र बोले- पूर्वकालमें राजाने वरुणदेवसे यह प्रतिज्ञा की थी कि मैं अपने प्रिय पुत्रको यज्ञीय पशु बनाकर यज्ञ करूँगा- यह … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 12 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:द्वादशोऽध्यायःपवित्र तीर्थोंका वर्णन, चित्तशुद्धिकी प्रधानता तथा इस सम्बन्धमें विश्वामित्र और वसिष्ठके परस्पर वैरकी कथा, राजा हरिश्चन्द्रका वरुणदेवके शापसे जलोदरग्रस्त होना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 12 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:द्वादशोऽध्यायःपवित्र तीर्थोंका वर्णन, चित्तशुद्धिकी प्रधानता तथा इस सम्बन्धमें विश्वामित्र और वसिष्ठके परस्पर वैरकी कथा, राजा हरिश्चन्द्रका वरुणदेवके शापसे जलोदरग्रस्त होना)   (अथ द्वादशोऽध्यायः) :-राजा बोले- हे मुनिश्रेष्ठ ! अब आप मुझे मनुष्यों और देवताओंके द्वारा सेवनीय इस पृथ्वीपर स्थित पुण्य तीर्थों, क्षेत्रों तथा नदियोंके विषयमें बताइये। … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 11 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकादशोऽध्यायः युगधर्म एवं तत्सम्बन्धी व्यवस्थाका वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 11 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकादशोऽध्यायः युगधर्म एवं तत्सम्बन्धी व्यवस्थाका वर्णन) (अथैकादशोऽध्यायः )   :-जनमेजय बोले- हे द्विजश्रेष्ठ ! पृथ्वीका भार उतारनेके लिये बलराम और श्रीकृष्णके अवतारकी बात आपने कही, किंतु मेरे मनमें एक संशय है ॥ १ ॥ द्वापरयुगके अन्तमें अत्यन्त दीन तथा आतुर होकर भारी बोझसे दबी हुई पृथ्वी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 10 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: दशमोऽध्यायःकर्मकी गहन गतिका वर्णन तथा इस सम्बन्धमें भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनका उदाहरण)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 10 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: दशमोऽध्यायःकर्मकी गहन गतिका वर्णन तथा इस सम्बन्धमें भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनका उदाहरण)   [अथ दशमोऽध्यायः]   :-जनमेजय बोले – हे ब्रह्मन् ! आपने अद्भुत कर्म करनेवाले इन्द्रका आख्यान कहा, जिसमें उनके पदच्युत होने और दुःख प्राप्त करनेका विशेषरूपसे वर्णन किया गया है तथा जिसमें देवताओंकी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 9 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:नवमोऽध्यायःशचीका इन्द्रसे अपना दुःख कहना, इन्द्रका शचीको सलाह देना कि वह नहुषसे ऋषियोंद्वारा वहन की जा रही पालकीमें आनेको कहे, नहुषका ऋषियोंद्वारा वहन की जा रही पालकीमें सवार होना और शापित होकर सर्प होना तथा इन्द्रका पुनः स्वर्गाधिपति बनना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 9 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:नवमोऽध्यायःशचीका इन्द्रसे अपना दुःख कहना, इन्द्रका शचीको सलाह देना कि वह नहुषसे ऋषियोंद्वारा वहन की जा रही पालकीमें आनेको कहे, नहुषका ऋषियोंद्वारा वहन की जा रही पालकीमें सवार होना और शापित होकर सर्प होना तथा इन्द्रका पुनः स्वर्गाधिपति बनना) [अथ नवमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- विशाल नेत्रोंवाली अपनी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 8 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथाष्टमोऽध्यायःइन्द्राणीको बृहस्पतिकी शरणमें जानकर नहुषका क्रुद्ध होना, देवताओंका नहुषको समझाना, बृहस्पतिके परामर्शसे इन्द्राणीका नहुषसे समय माँगना, देवताओंका भगवान् विष्णुके पास जाना और विष्णुका उन्हें देवीको प्रसन्न करनेके लिये अश्वमेधयज्ञ करनेको कहना, बृहस्पतिका शचीको भगवतीकी आराधना करनेको कहना, शचीकी आराधनासे प्रसन्न होकर देवीका प्रकट होना और शचीको इन्द्रका दर्शन होना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 8 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथाष्टमोऽध्यायःइन्द्राणीको बृहस्पतिकी शरणमें जानकर नहुषका क्रुद्ध होना, देवताओंका नहुषको समझाना, बृहस्पतिके परामर्शसे इन्द्राणीका नहुषसे समय माँगना, देवताओंका भगवान् विष्णुके पास जाना और विष्णुका उन्हें देवीको प्रसन्न करनेके लिये अश्वमेधयज्ञ करनेको कहना, बृहस्पतिका शचीको भगवतीकी आराधना करनेको कहना, शचीकी आराधनासे प्रसन्न होकर देवीका प्रकट होना और शचीको … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 7 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:सप्तमोऽध्यायःत्वष्टाका वृत्रासुरकी पारलौकिक क्रिया करके इन्द्रको शाप देना, इन्द्रको ब्रह्महत्या लगना, नहुषका स्वर्गाधिपति बनना और इन्द्राणीपर आसक्त होना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 7 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:सप्तमोऽध्यायःत्वष्टाका वृत्रासुरकी पारलौकिक क्रिया करके इन्द्रको शाप देना, इन्द्रको ब्रह्महत्या लगना, नहुषका स्वर्गाधिपति बनना और इन्द्राणीपर आसक्त होना) [अथ सप्तमोऽध्यायः]   :-व्यासजी बोले- इस प्रकार उसे गिरा हुआ देखकर मन-ही-मन हत्याके भयसे सशंकित भगवान् विष्णु वैकुण्ठलोकको चले गये ॥ १ ॥ तत्पश्चात् इन्द्र भी भयभीत होकर … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 6 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:षष्ठोऽध्यायःभगवान् विष्णुका इन्द्रको वृत्रासुरसे सन्धिका परामर्श देना, ऋषियोंकी मध्यस्थतासे इन्द्र और वृत्रासुरमें सन्धि, इन्द्रद्वारा छलपूर्वक वृत्रासुरका वध)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 6 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:षष्ठोऽध्यायःभगवान् विष्णुका इन्द्रको वृत्रासुरसे सन्धिका परामर्श देना, ऋषियोंकी मध्यस्थतासे इन्द्र और वृत्रासुरमें सन्धि, इन्द्रद्वारा छलपूर्वक वृत्रासुरका वध) [अथ षष्ठोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- इस प्रकार वरप्राप्त उन देवता और तपस्वी ऋषिगणोंने (परस्पर मन्त्रणा करके वृत्रासुरके उत्तम आश्रमके लिये प्रस्थान किया) वहाँ तेजसे प्रकाशमान वृत्रासुरको देखा, जो तीनों लोकोंको … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 5 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:पञ्चमोऽध्यायःभगवान् विष्णुकी प्रेरणासे देवताओंका भगवतीकी स्तुति करना और प्रसन्न होकर भगवतीका वरदान देना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 5 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:पञ्चमोऽध्यायःभगवान् विष्णुकी प्रेरणासे देवताओंका भगवतीकी स्तुति करना और प्रसन्न होकर भगवतीका वरदान देना) [अथ पञ्चमोऽध्यायः] :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! तब सभी तत्त्वोंके ज्ञाता माधव भगवान् विष्णु समस्त देवताओंको चिन्तासे व्याकुल तथा अत्यन्त प्रेमविह्वल देखकर कहने लगे ॥ १ ॥ विष्णु बोले- हे देवगण ! आप … Read more

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