Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 24 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायः धृतराष्ट्रके जन्मकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 24 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:चतुर्विंशोऽध्यायः धृतराष्ट्रके जन्मकी कथा) (अथ चतुर्विंशोऽध्यायः ) :-राजा बोले- हे भगवन् ! आपके मुखार- विन्दसे निर्गत इस अमृततुल्य दिव्य कथारसका निरन्तर पान करते रहनेपर भी मैं तृप्त नहीं हो पा रहा हूँ ॥ १॥ आपके द्वारा मुझसे यह विचित्र आख्यान • विस्तारपूर्वक कहा गया; हैहयवंशी राजाओंकी … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 23 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःभगवतीके सिद्धिप्रदायक मन्त्रसे दीक्षित एकवीरद्वारा कालकेतुका वध, एकवीर और एकावलीका विवाह तथा हैहयवंशकी परम्परा)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 23 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:त्रयोविंशोऽध्यायःभगवतीके सिद्धिप्रदायक मन्त्रसे दीक्षित एकवीरद्वारा कालकेतुका वध, एकवीर और एकावलीका विवाह तथा हैहयवंशकी परम्परा) (अथ त्रयोविंशोऽध्यायः) :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! उस यशोवतीकी सुनकर लक्ष्मीपुत्र प्रतापी एकवीरका बात मुखारविन्द प्रसन्नतासे खिल उठा और वे उससे कहने लगे – ॥ १॥ राजा बोले- हे रम्भोरु ! जो … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 22 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: द्वाविंशोऽध्यायःयशोवतीका एकवीरसे कालकेतुद्वारा एकावलीके अपहृत होनेकी बात बताना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 22 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: द्वाविंशोऽध्यायःयशोवतीका एकवीरसे कालकेतुद्वारा एकावलीके अपहृत होनेकी बात बताना)   (अथ द्वाविंशोऽध्यायः)   :-यशोवती बोली – एक बार वह सुन्दरी एकावली प्रातःकाल उठकर अपनी सखियोंके साथ बाहर निकल पड़ी। वह बहुत-से रक्षकोंसे रक्षित थी तथा उसके ऊपर चॅवर डुलाये जा रहे थे। हे राजेन्द्र ! वह … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 21 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःआखेटके लिये वनमें गये राजासे एकावलीकी सखी यशोवतीकी भेंट, एकावलीके जन्मकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 21 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकविंशोऽध्यायःआखेटके लिये वनमें गये राजासे एकावलीकी सखी यशोवतीकी भेंट, एकावलीके जन्मकी कथा)   (अथैकविंशोऽध्यायः)   :-व्यासजी बोले- हे राजन् ! तत्पश्चात् राजा हरिवर्माने बालकके जातकर्म आदि संस्कार किये। भलीभाँति पालित-पोषित होनेके कारण वह बालक दिनोदिन शीघ्रतासे बढ़ने लगा ॥ १ ॥ इस प्रकार पुत्रजनित सांसारिक सुख … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 20 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:विंशोऽध्यायःराजा हरिवर्माको भगवान् विष्णुद्वारा अपना है हयसंज्ञक पुत्र देना, राजाद्वारा उसका ‘एकवीर’ नाम रखना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 20 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:विंशोऽध्यायःराजा हरिवर्माको भगवान् विष्णुद्वारा अपना  हयसंज्ञक पुत्र देना, राजाद्वारा उसका ‘एकवीर’ नाम रखना) (अथ विंशोऽध्यायः) :-जनमेजय बोले – [हे मुनिवर !] मुझे इस विषयमें यह महान् संशय हो रहा है कि भगवान्ने उत्पन्न होते ही उस बालकका त्याग कर दिया। निर्जन वनमें उस असहाय बालककी देखभाल … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 19 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःभगवती लक्ष्मीको अश्वरूपधारी भगवान् विष्णुके दर्शन और उनका वैकुण्ठगमन)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 19 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथैकोनविंशोऽध्यायःभगवती लक्ष्मीको अश्वरूपधारी भगवान् विष्णुके दर्शन और उनका वैकुण्ठगमन)   (अथैकोनविंशोऽध्यायः)   :-व्यासजी बोले- उन लक्ष्मीजीको वरदान देकर भगवान् शंकर देवगणोंसे सेवित तथा अप्सराओंसे सुशोभित रमणीक कैलासपर शीघ्र चले गये ॥ १ ॥ वहाँ पहुँचते ही शंकरजीने लक्ष्मीका कार्य सिद्ध करनेके उद्देश्यसे अपने कार्यकुशल गण चित्ररूपको … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 18 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथाष्टादशोऽध्यायः भगवती लक्ष्मीद्वारा घोड़ीका रूप धारणकर तपस्या करना)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 18 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:अथाष्टादशोऽध्यायः भगवती लक्ष्मीद्वारा घोड़ीका रूप धारणकर तपस्या करना)   (अथाष्टादशोऽध्यायः )   :-जनमेजय बोले- [हे मुने!] इस प्रकार कोप करके भगवान्‌के द्वारा शापित लक्ष्मीजीने घोड़ीके रूपमें किस प्रकार जन्म लिया और इसके बाद रेवन्तने क्या किया ? ॥ १ ॥ अपने पतिके प्रवासमें रहनेके कारण उसके … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 17 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:सप्तदशोऽध्यायःभगवतीकी कृपासे भार्गव ब्राह्मणीकी जंघासे तेजस्वी बालककी उत्पत्ति, हैहयवंशी क्षत्रियोंकी उत्पत्तिकी कथा)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 17 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध:सप्तदशोऽध्यायःभगवतीकी कृपासे भार्गव ब्राह्मणीकी जंघासे तेजस्वी बालककी उत्पत्ति, हैहयवंशी क्षत्रियोंकी उत्पत्तिकी कथा) (अथ सप्तदशोऽध्यायः) :-जनमेजय बोले- भृगुवंशकी स्त्रियोंका पुनः दुःखरूप समुद्रसे कैसे उद्धार हुआ और उन ब्राह्मणोंकी वंशपरम्परा किस प्रकार स्थिर रही ? ॥१॥ लोभके वशीभूत तथा पापाचारी हैहय क्षत्रियोंने उन ब्राह्मणोंको मारनेके पश्चात् कौन-सा कार्य … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 16 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: षोडशोऽध्यायःहैहयवंशी क्षत्रियोंद्वारा भृगुवंशी ब्राह्मणोंका संहार)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 16 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: षोडशोऽध्यायःहैहयवंशी क्षत्रियोंद्वारा भृगुवंशी ब्राह्मणोंका संहार) [ अथ षोडशोऽध्यायः]   :-जनमेजय बोले- जिन हैहय क्षत्रियोंने ब्रह्म- हत्याकी लेशमात्र भी चिन्ता न करके भृगुवंशी ब्राह्मणोंका वध कर दिया, वे किसके कुलमें उत्पन्न हुए थे ? ॥ १ ॥ हे पितामह ! उनके वैरका क्या कारण था, आप … Read more

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 15 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठःपञ्चदशोऽध्यायःभगवतीकी कृपासे निमिको मनुष्योंके नेत्र-पलकोंमें वासस्थान मिलना तथा संसारी प्राणियोंकी त्रिगुणात्मकताका वर्णन)

Devi bhagwat puran skandh 6 chapter 15 (श्रीमद्देवीभागवतमहापुराण षष्ठः स्कन्ध: पञ्चदशोऽध्यायःभगवतीकी कृपासे निमिको मनुष्योंके नेत्र-पलकोंमें वासस्थान मिलना तथा संसारी प्राणियोंकी त्रिगुणात्मकताका वर्णन)   (अथ पञ्चदशोऽध्यायः)   :-जनमेजय बोले- आपने वसिष्ठकी शरीर- प्राप्तिका वर्णन किया; निमिने पुनः किस प्रकार देह प्राप्त की; यह मुझसे कहिये ॥ १ ॥ व्यासजी बोले- हे राजन् ! वसिष्ठने जिस प्रकार … Read more

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