Shiv puran kailash samhita chapter 15 or 16 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 15 और 16 शैवदर्शनके अनुसार शिवतत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्वके विषयमें विशद विवेचन तथा शिवसे जीव और जगत्‌की अभिन्नताका प्रतिपादन)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 15 or 16 (शिवपुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 15 और 16 शैवदर्शनके अनुसार शिवतत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्वके विषयमें विशद विवेचन तथा शिवसे जीव और जगत्‌की अभिन्नताका प्रतिपादन) :-तदनन्तर उत्तम श्रेष्ठ पद्धतिका वर्णन करके सृष्टि, स्थिति और संहार-सबको शक्तिमान् शिवकी लीला बतलाते हुए वामदेवजीके पूछनेपर स्कन्दने कहा- मुने ! कर्मास्तितत्त्वसे लेकर … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 14 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 14 प्रणवके अर्थोंका विवेचन)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 14 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 14 प्रणवके अर्थोंका विवेचन) :-वामदेवजी बोले-भगवान् षडानन ! सम्पूर्ण विज्ञानमय अमृतके सागर ! समस्त देवताओंके स्वामी महेश्वरके पुत्र ! प्रणतार्तिके भंजन कार्तिकेय ! आपने कहा है कि प्रणवके छः प्रकारके अर्थोंका परिज्ञान अभीष्ट वस्तुको देनेवाला है। यह छः प्रकारके अर्थोंका ज्ञान क्या है? … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 13 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 13 संन्यासग्रहणकी शास्त्रीय विधि – गणपति-पूजन, होम, तत्त्व-शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदिका प्रकार)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 13 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 13 संन्यासग्रहणकी शास्त्रीय विधि – गणपति-पूजन, होम, तत्त्व-शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदिका प्रकार) :-स्कन्द कहते हैं-वामदेव ! तदनन्तर मध्याह्नकालमें स्नान करके साधक अपने मनको वशमें रखते हुए गन्ध, पुष्प और अक्षत आदि पूजा-द्रव्योंको ले आये और नैर्ऋत्यकोणमें देवपूजित विघ्नराज गणेशकी पूजा करे। … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 12 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 12 प्रणवके वाच्यार्थरूप सदाशिवके स्वरूपका ध्यान, वर्णाश्रम-धर्मके पालनका महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यासके पूर्वागभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदिका वर्णन)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 12 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 12 प्रणवके वाच्यार्थरूप सदाशिवके स्वरूपका ध्यान, वर्णाश्रम-धर्मके पालनका महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यासके पूर्वागभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदिका वर्णन) :-श्रीस्कन्दने कहा-महाभाग मुनीश्वर वामदेव ! तुम्हें साधुवाद है; क्योंकि तुम भगवान् शिवके अत्यन्त भक्त हो और शिवतत्त्वके ज्ञाताओंमें सबसे श्रेष्ठ हो। तीनों लोकोंमें कहीं कोई … Read more

Shiv puran kailash samhita chapter 1 to 11 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 1 से 11 ऋषियोंका सूतजीसे तथा वामदेवजीका स्कन्दसे प्रश्न – प्रणवार्थ-निरूपणके लिये अनुरोध)

(कैलाससंहिता) Shiv puran kailash samhita chapter 1 to 11 (शिव पुराण  कैलाससंहिता  संहिता अध्याय 1 से 11 ऋषियोंका सूतजीसे तथा वामदेवजीका स्कन्दसे प्रश्न – प्रणवार्थ-निरूपणके लिये अनुरोध) “:-नमः शिवाय साम्बाय सगणाय ससूनवे । प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तहेतवे ॥” जो प्रधान (प्रकृति) और पुरुषके नियन्ता तथा सृष्टि, पालन और संहारके कारण हैं, उन पार्वतीसहित शिवको उनके पार्षदों और … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 51 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 51 देवीके क्रियायोगका वर्णन – देवीकी मूर्ति एवं मन्दिरके निर्माण, स्थापन और पूजनका महत्त्व, परा अम्बाकी श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियोंमें देवीके व्रत, उत्सव और पूजन आदिके फल तथा इस संहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 51 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 51 देवीके क्रियायोगका वर्णन – देवीकी मूर्ति एवं मन्दिरके निर्माण, स्थापन और पूजनका महत्त्व, परा अम्बाकी श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियोंमें देवीके व्रत, उत्सव और पूजन आदिके फल तथा इस संहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा) :-व्यासजी बोले-महामते, ब्रह्मपुत्र, सर्वज्ञ सनत्कुमार ! मैं उमाके … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 50 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 50 देवीके द्वारा दुर्गमासुरका वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़नेका कारण)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 50 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 50 देवीके द्वारा दुर्गमासुरका वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़नेका कारण) :-मुनियोंने कहा-महाप्राज्ञ सूतजी ! हम सब लोग प्रतिदिन दुर्गाजीका चरित्र सुनना चाहते हैं। अतः आप और किसी अद्भुत लीलातत्त्वका हमारे समक्ष वर्णन कीजिये। सर्वज्ञशिरोमणे सूत ! आपके … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 49 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 49  देवताओंका गर्व दूर करनेके लिये तेजःपुंजरूपिणी उमाका प्रादुर्भाव)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 49 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 49  देवताओंका गर्व दूर करनेके लिये तेजःपुंजरूपिणी उमाका प्रादुर्भाव) :-मुनियोंने कहा-सम्पूर्ण पदार्थोंके पूर्ण ज्ञाता सूतजी ! भुवनेश्वरी उमाके, जिनसे सरस्वती प्रकट हुई थीं, अवतारका पुनः वर्णन कीजिये। वे देवी परब्रह्म, मूलप्रकृति, ईश्वरी, निराकार होती हुई भी साकार तथा नित्यानन्दमयी सती कही जाती हैं। … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 48 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 48 देवीके द्वारा सेना और सेनापतियोंसहित निशुम्भ एवं शुम्भका संहार)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 48 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 48 देवीके द्वारा सेना और सेनापतियोंसहित निशुम्भ एवं शुम्भका संहार) :-ऋषि कहते हैं- राजन् ! प्रशंसनीय पराक्रमशाली महान् असुर शुम्भने इन श्रेष्ठ दैत्योंका मारा जाना सुनकर अपने उन दुर्जय गणोंको युद्धके लिये जानेकी आज्ञा दी, जो संग्रामका नाम सुनते ही हर्षसे खिल उठते … Read more

Shiv puran uma samhita chapter 47 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 47 देवी उमाके शरीरसे सरस्वतीका आविर्भाव, उनके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना, दूतके निराश लौटनेपर शुम्भका क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड तथा रक्तबीजको भेजना और देवीके द्वारा उन सबका मारा जाना)

(उमासंहिता) Shiv puran uma samhita chapter 47 (शिव पुराण  उमा संहिता अध्याय 47 देवी उमाके शरीरसे सरस्वतीका आविर्भाव, उनके रूपकी प्रशंसा सुनकर शुम्भका उनके पास दूत भेजना, दूतके निराश लौटनेपर शुम्भका क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड तथा रक्तबीजको भेजना और देवीके द्वारा उन सबका मारा जाना) :-ऋषि कहते हैं-पूर्वकालमें शुम्भ और निशुम्भ नामके दो प्रतापी दैत्य … Read more

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