Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 6 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 6 शिवके शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, सर्वमय, सर्वव्यापक एवं सर्वातीत स्वरूपका तथा उनकी प्रणवरूपताका प्रतिपादन)
वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड) Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 6 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 6 शिवके शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, सर्वमय, सर्वव्यापक एवं सर्वातीत स्वरूपका तथा उनकी प्रणवरूपताका प्रतिपादन) :-उपमन्यु कहते हैं-यदुनन्दन ! शिवको न तो आणव मलका ही बन्धन प्राप्त है, न कर्मका और न मायाका ही। प्राकृत, बौद्ध, अहंकार, मन, चित्त, इन्द्रिय, तन्मात्रा … Read more