Sri ramcharitmanas pratham sopan balkand chapter 1 to 14 manglacharan (श्रीरामचरितमानस प्रथम सोपान बालकाण्ड अध्याय 1 से 14  मंगलाचरण ,गुरु वंदना ,ब्राह्मण-संत वंदना,खल वंदना, संत-असंत वंदना,रामरूप से जीवमात्र की वंदना, तुलसीदासजी की दीनता और राम भक्तिमयी कविता की महिमा’ कवि वंदना, “वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदि की वंदना “श्री सीताराम-धाम-परिकर वंदना”श्री नाम वंदना और नाम महिमा” श्री रामगुण और श्री रामचरित् की महिमा” मानस निर्माण की तिथि,” मानस का रूपक और माहात्म्य”)

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ (श्रीजानकीवल्लभो विजयते) (श्रीरामचरितमानस) (प्रथम सोपान) (बालकाण्ड) Sri ramcharitmanas pratham sopan balkand chapter 1 to 14 manglacharan (श्रीरामचरितमानस प्रथम सोपान बालकाण्ड अध्याय 1 से 14  मंगलाचरण ,गुरु वंदना ,ब्राह्मण-संत वंदना,खल वंदना, संत-असंत वंदना,रामरूप से जीवमात्र की वंदना, तुलसीदासजी की दीनता और राम भक्तिमयी कविता की महिमा’ कवि वंदना, “वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, … Read more

Sri ramcharitmanas introduction(श्रीरामचरितमानस प्रस्तावना)

(श्री गणेशाय नमः) (श्रीजानकीवल्लभो विजयते) Sri ramcharitmanas introduction(श्रीरामचरितमानस प्रस्तावना) (श्रीरामचरितमानस) :-श्रीरामचरितमानस १५वीं शताब्दी के कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाकाव्य है। जैसा कि स्वयं गोस्वामी जी ने श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में लिखा है कि उन्होंने श्रीरामचरितमानस की रचना का आरम्भ अयोध्या में विक्रम संवत १६३१ (१५७४ ईस्वी) को रामनवमी के दिन (मंगलवार) किया था।   … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 41 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 41 मेरुगिरिके स्कन्द-सरोवरके तटपर मुनियोंका सनत्कुमारजीसे मिलना, भगवान् नन्दीका वहाँ आना और दृष्टिपातमात्रसे पाशछेदन एवं ज्ञानयोगका उपदेश करके चला जाना, शिवपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 41 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 41 मेरुगिरिके स्कन्द-सरोवरके तटपर मुनियोंका सनत्कुमारजीसे मिलना, भगवान् नन्दीका वहाँ आना और दृष्टिपातमात्रसे पाशछेदन एवं ज्ञानयोगका उपदेश करके चला जाना, शिवपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार) :-सूतजी कहते हैं-वहाँ मेरु पर्वतपर सागरके समान एक विशाल सरोवर है, जिसका नाम स्कन्द-सर है। … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 40 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 40 वायुदेवका अन्तर्धान, ऋषियोंका सरस्वतीमें अवभृथ-स्नान और काशीमें दिव्य तेजका दर्शन करके ब्रह्माजीके पास जाना, ब्रह्माजीका उन्हें सिद्धि-प्राप्तिकी सूचना देकर मेरुके कुमारशिखरपर भेजना)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 40 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 40 वायुदेवका अन्तर्धान, ऋषियोंका सरस्वतीमें अवभृथ-स्नान और काशीमें दिव्य तेजका दर्शन करके ब्रह्माजीके पास जाना, ब्रह्माजीका उन्हें सिद्धि-प्राप्तिकी सूचना देकर मेरुके कुमारशिखरपर भेजना)   :-सूतजी कहते हैं-इस प्रकार क्रोधको जीतनेवाले उपमन्युसे यदुकुलनन्दन श्रीकृष्णने जो ज्ञानयोग प्राप्त किया था, उसका प्रणतभावसे … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 39 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 39 ध्यान और उसकी महिमा, योगधर्म तथा शिवयोगी का महत्त्व  शिवभक्त या शिवके लिये प्राण देने अथवा शिवक्षेत्रमें मरणसे तत्काल मोक्ष-लाभका कथन)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 39 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 39 ध्यान और उसकी महिमा, योगधर्म तथा शिवयोगी का महत्त्व  शिवभक्त या शिवके लिये प्राण देने अथवा शिवक्षेत्रमें मरणसे तत्काल मोक्ष-लाभका कथन) :-उपमन्यु कहते हैं- श्रीकृष्ण ! श्रीकण्ठनाथका स्मरण करनेवाले लोगोंके सम्पूर्ण मनोरथोंकी सिद्धि तत्काल हो जाती है, ऐसा जानकर … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 38 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 38 योगमार्गके विघ्न, सिद्धि-सूचक उपसर्ग तथा पृथ्वीसे लेकर बुद्धि- तत्त्वपर्यन्त ऐश्वर्यगुणोंका वर्णन, शिव-शिवाके ध्यानकी महिमा)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 38 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 38 योगमार्गके विघ्न, सिद्धि-सूचक उपसर्ग तथा पृथ्वीसे लेकर बुद्धि- तत्त्वपर्यन्त ऐश्वर्यगुणोंका वर्णन, शिव-शिवाके ध्यानकी महिमा) :-उपमन्यु कहते हैं- श्रीकृष्ण ! आलस्य, तीक्ष्ण व्याधियाँ, प्रमाद, स्थान-संशय, अनवस्थितचित्तता, अश्रद्धा, भ्रान्ति-दर्शन,दुःख, दौर्मनस्य और विषयलोलुपता – ये दस योगसाधनमें लगे हुए पुरुषोंके लिये योगमार्गके … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 37 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 37 योगके अनेक भेद, उसके आठ और छः अंगोंका विवेचन – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, दशविध प्राणोंको जीतनेकी महिमा, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधिका निरूपण)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 37 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 37 योगके अनेक भेद, उसके आठ और छः अंगोंका विवेचन – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, दशविध प्राणोंको जीतनेकी महिमा, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधिका निरूपण)  :-श्रीकृष्णने कहा- भगवन् ! आपने ज्ञान, क्रिया और चर्याका संक्षिप्त सार उद्धृत करके मुझे सुनाया … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 33 to 36 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 33 to 36 पारलौकिक फल देनेवाले कर्म – शिवलिंग-महाव्रतकी विधि और महिमाका वर्णन)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 33 to 36 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 33 to 36 पारलौकिक फल देनेवाले कर्म – शिवलिंग-महाव्रतकी विधि और महिमाका वर्णन) :-उपमन्यु कहते हैं-यदुनन्दन ! अब मैं केवल परलोकमें फल देनेवाले कर्मकी विधि बतलाऊँगा। तीनों लोकोंमें इसके समान दूसरा कोई कर्म नहीं है। यह विधि अतिशय … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 32 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 32 ऐहिक फल देनेवाले कर्मों और उनकी विधिका वर्णन, शिव- पूजनकी विधि, शान्ति-पुष्टि आदि विविध काम्य कर्मोंमें विभिन्न हवनीय पदार्थोंके उपयोगका विधान)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 32 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 32 ऐहिक फल देनेवाले कर्मों और उनकी विधिका वर्णन, शिव- पूजनकी विधि, शान्ति-पुष्टि आदि विविध काम्य कर्मोंमें विभिन्न हवनीय पदार्थोंके उपयोगका विधान) :-उपमन्यु कहते हैं- श्रीकृष्ण ! यह मैंने तुमसे इहलोक और परलोकमें सिद्धि प्रदान करनेवाला क्रम बताया है, जो … Read more

Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 31 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 31 शिवके पाँच आवरणोंमें स्थित सभी देवताओंकी स्तुति तथा उनसे अभीष्टपूर्ति एवं मंगलकी कामना)

[वायवीयसंहिता (उत्तरखण्ड)] Shiv puran vayu samhita uttar khand chapter 31 (शिव पुराण वायु संहिता अध्याय 31 शिवके पाँच आवरणोंमें स्थित सभी देवताओंकी स्तुति तथा उनसे अभीष्टपूर्ति एवं मंगलकी कामना) उपमन्युरुवाच स्तोत्रं वक्ष्यामि ते कृष्ण पञ्चावरणमार्गतः । योगेश्वरमिदं पुण्यं कर्म येन समाप्यते ॥ १ ॥ :-उपमन्यु कहते हैं- श्रीकृष्ण ! अब मैं तुम्हारे समक्ष पंचावरण-मार्गसे किये … Read more

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